लखनऊ

स्मार्ट मीटर से राहत ; यूपी में फिर लौट सकते हैं पुराने मीटर

✍️ चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश में बिजली का मुद्दा अब केवल तकनीकी व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक विषय बन चुका है। प्रदेश के करीब 75 लाख घरों में लगाए गए स्मार्ट प्रीपेड मीटर अब लोगों के लिए सुविधा कम और परेशानी का कारण ज्यादा बनते जा रहे हैं। बढ़े हुए बिजली बिल, अचानक बिजली कटने और नेगेटिव बैलेंस जैसी समस्याओं ने आम उपभोक्ताओं को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है।

ऐसे में योगी सरकार द्वारा स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगाने का फैसला लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर लेकर आया है। लेकिन जिन घरों में पहले से ये मीटर लग चुके हैं, उनके मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वे वापस पुराने मीटर लगवा सकते हैं और अगर हाँ, तो इसका तरीका क्या है।

⚡ स्मार्ट मीटर बना सिरदर्द क्यों?

जब स्मार्ट प्रीपेड मीटर की शुरुआत हुई थी, तब इसे पारदर्शी और आधुनिक तकनीक के रूप में पेश किया गया था। दावा किया गया था कि इससे बिजली चोरी रुकेगी और बिलिंग सिस्टम पूरी तरह ईमानदार होगा। लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आई। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की कि रिचार्ज करने के बावजूद मीटर नेगेटिव बैलेंस दिखाता है और बिना चेतावनी के बिजली काट दी जाती है।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि लाखों घरों की बिजली अचानक कट गई। लोग कई दिनों तक रिचार्ज करने के बावजूद अंधेरे में रहने को मजबूर हुए। लखनऊ, कानपुर, आजमगढ़, महोबा और बांदा जैसे जिलों में लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। उनका आरोप था कि बिना सहमति के जबरन पुराने मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।

🏛️ सरकार का बड़ा फैसला

जनता के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने तत्काल प्रभाव से स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन पर रोक लगा दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बिजली विभाग ने चार सदस्यीय तकनीकी समिति का गठन किया है। यह समिति स्मार्ट मीटर की सटीकता, बिलिंग सॉफ्टवेयर और ओवर-बिलिंग की शिकायतों की जांच करेगी।

ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने स्पष्ट किया है कि नए कनेक्शन पर स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे, लेकिन जिन उपभोक्ताओं के पास पहले से पुराने मीटर हैं, उन पर कोई दबाव नहीं बनाया जाएगा। साथ ही, मीटर लगाने वाली कंपनियों के भुगतान पर भी रोक लगा दी गई है, जिससे कार्य में पारदर्शिता लाई जा सके।

⚖️ उपभोक्ता के अधिकार क्या कहते हैं?

कानून के अनुसार, बिजली उपभोक्ताओं को यह अधिकार प्राप्त है कि वे अपने मीटर का प्रकार स्वयं चुन सकें। विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ता यह तय कर सकता है कि वह प्रीपेड मीटर रखना चाहता है या पोस्टपेड। इस मुद्दे को उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद ने भी मजबूती से उठाया है और नियामक आयोग में इसे लेकर आवाज बुलंद की गई है।

इसका मतलब साफ है कि यदि कोई उपभोक्ता स्मार्ट प्रीपेड मीटर से संतुष्ट नहीं है, तो वह इसे बदलवाने का अधिकार रखता है।

📝 मीटर बदलवाने का तरीका

अगर आपके घर में स्मार्ट मीटर लग चुका है और आप इसे हटवाकर पुराना पोस्टपेड मीटर लगवाना चाहते हैं, तो आपको अपने क्षेत्र के बिजली विभाग कार्यालय में लिखित आवेदन देना होगा। आवेदन में अपना नाम, कंज्यूमर नंबर और पूरा पता दर्ज करना जरूरी है। साथ ही यह स्पष्ट लिखें कि आप प्रीपेड से पोस्टपेड में बदलाव चाहते हैं।

आवेदन करते समय केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की अधिसूचना का हवाला देना आपके पक्ष को मजबूत बनाता है। ध्यान रखें कि इस प्रक्रिया में लगभग 2000 रुपये की सिक्योरिटी राशि जमा करनी पड़ सकती है, जो बाद में रिफंड की जाती है।

📄 समयसीमा और अगला कदम

जब आप आवेदन जमा करें, तो उसकी रिसीविंग जरूर लें जिस पर अधिकारी के हस्ताक्षर और तारीख हो। यह दस्तावेज आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण होता है। यदि 7 से 10 दिनों के भीतर कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो आप उच्च अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।

इसके बाद भी यदि समस्या का समाधान नहीं होता, तो उपभोक्ता फोरम या नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।

🏢 शिकायत के लिए विकल्प

अगर जिला स्तर पर आपकी सुनवाई नहीं होती है, तो आप उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) या उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यहां आप न केवल मीटर बदलवाने की मांग कर सकते हैं, बल्कि गलत बिलिंग के खिलाफ मुआवजा भी मांग सकते हैं।

उपभोक्ता परिषद भी ऐसे मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रही है और लोगों को कानूनी सहायता प्रदान कर रही है, ताकि बिजली विभाग की मनमानी पर रोक लगाई जा सके।

🔍 आगे क्या होगा?

फिलहाल सरकार के फैसले से यह साफ हो गया है कि स्मार्ट मीटर को लेकर जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। तकनीकी जांच के बाद ही आगे की रणनीति तय होगी। तब तक उपभोक्ताओं के पास यह मौका है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार मीटर का चयन करें और अपने अधिकारों का इस्तेमाल करें।

❓ FAQ

क्या स्मार्ट मीटर हटवाकर पुराना मीटर लगवाया जा सकता है?

हाँ, उपभोक्ता आवेदन देकर प्रीपेड से पोस्टपेड मीटर में बदलाव करवा सकता है।

मीटर बदलवाने के लिए कितना शुल्क देना होगा?

करीब 2000 रुपये की सिक्योरिटी जमा करनी पड़ सकती है, जो बाद में वापस मिल जाती है।

अगर विभाग कार्रवाई नहीं करे तो क्या करें?

आप UPERC या उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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