स्मार्ट प्रीपेड मीटर के विरोध में ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, पॉवर हाउस पर जोरदार प्रदर्शन
राम कीर्ति यादव की रिपोर्ट
जौनपुर. स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर ग्रामीण इलाकों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने मूर्तज़ाबाद पॉवर हाउस पर पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल रहे, जिन्होंने नारेबाजी करते हुए बिजली विभाग के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।
प्रदर्शनकारी ग्राम पंचायत जगदीशपुर, पोस्ट मुफ़्तीगंज क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाने के बाद उनकी समस्याएं कम होने के बजाय और बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि मीटर में यूनिट खपत वास्तविक से अधिक दिखाई जा रही है, जिससे उन्हें पहले की तुलना में ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि पहले बिजली बिल मासिक आधार पर आता था, जिससे उन्हें भुगतान करने में कुछ समय मिल जाता था। लेकिन अब प्रीपेड मीटर प्रणाली के तहत पहले से रिचार्ज कराना पड़ता है, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ गया है। मजदूरी और छोटे-मोटे काम करने वाले परिवारों के लिए यह व्यवस्था और भी मुश्किल साबित हो रही है।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने भी खुलकर अपनी बात रखी। उनका कहना था कि महंगाई पहले से ही घरेलू बजट को प्रभावित कर रही है, ऐसे में बिजली पर बढ़ता खर्च उनकी परेशानियों को दोगुना कर रहा है। एक महिला ने कहा, “हम लोग किसी तरह घर चला रहे हैं, लेकिन अब बिजली के लिए बार-बार रिचार्ज कराना पड़ता है। ऊपर से मीटर भी सही रीडिंग नहीं दे रहा, जिससे और ज्यादा पैसा खर्च हो रहा है।”
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर बिजली विभाग से संपर्क किया, तो उन्हें कोई ठोस समाधान नहीं मिला। कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इससे नाराज होकर ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन का निर्णय लिया और पॉवर हाउस पहुंचकर अपनी आवाज बुलंद की।
मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने फिटर के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि विभागीय लापरवाही के कारण आम जनता को परेशान होना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि जिन मीटरों में गड़बड़ी है, उनकी जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत बदला जाए। साथ ही, प्रीपेड मीटर व्यवस्था में सुधार किया जाए ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया था, लेकिन स्थानीय लोगों और जिम्मेदार व्यक्तियों की सूझबूझ से स्थिति नियंत्रण में रही। सूचना मिलने पर बिजली विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। अधिकारियों ने लोगों को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं की जांच कराई जाएगी और जल्द ही समाधान निकाला जाएगा।
बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना का उद्देश्य बिजली उपभोग को पारदर्शी बनाना और बकाया बिल की समस्या को खत्म करना है। इस योजना के तहत उपभोक्ता जितनी बिजली उपयोग करेगा, उतना ही भुगतान करेगा। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी माना कि शुरुआती चरण में तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं, जिन्हें धीरे-धीरे दूर किया जा रहा है।
इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है और उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
यह मामला यह भी दर्शाता है कि नई तकनीक को लागू करते समय स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखना कितना जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां आय के स्रोत सीमित होते हैं, वहां किसी भी नई व्यवस्था का सीधा असर लोगों के दैनिक जीवन पर पड़ता है।
फिलहाल, ग्रामीणों का आक्रोश बिजली विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अब यह देखना होगा कि विभाग कितनी तेजी से इन समस्याओं का समाधान करता है और लोगों का विश्वास जीतने में कितना सफल होता है। अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में इस तरह के विरोध प्रदर्शन और तेज हो सकते हैं।
❓ जरूरी सवाल-जवाब
स्मार्ट प्रीपेड मीटर के खिलाफ प्रदर्शन क्यों हुआ?
ग्रामीणों का आरोप है कि मीटर में यूनिट खपत अधिक दिख रही है और बिजली खर्च पहले से ज्यादा आ रहा है, जिससे नाराज होकर प्रदर्शन किया गया।
प्रदर्शन में कौन-कौन शामिल थे?
बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष शामिल हुए, जिन्होंने नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जताई।
ग्रामीणों की मुख्य मांग क्या है?
मीटर की जांच कराई जाए, गड़बड़ी वाले मीटर बदले जाएं और बिजली खर्च को नियंत्रण में लाने के उपाय किए जाएं।
क्या बिजली विभाग ने कोई आश्वासन दिया?
अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच और जल्द समाधान का आश्वासन दिया है।
आगे क्या हो सकता है?
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।











