स्मार्ट सिटी के दावों के बीच मौत का सच : गूलर रोड हादसे ने खोली सिस्टम की पोल, युवक की मौत पर उबाल
अलीगढ़ की सड़कों पर बिखरी यह कहानी सिर्फ एक हादसे की नहीं, बल्कि उस सच्चाई की है जो “स्मार्ट सिटी” के चमकदार दावों के पीछे दबा दी जाती है। गूलर रोड पर हुई युवा कारोबारी विकास राठौर की दर्दनाक मौत ने शहर के विकास मॉडल पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह घटना महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस लापरवाही का परिणाम प्रतीत होती है, जो लंबे समय से शहर की सड़कों और अधूरी परियोजनाओं में साफ दिखाई दे रही है।
कैसे हुआ दर्दनाक हादसा?
बताया जाता है कि विकास राठौर देर रात अपनी बाइक से गूलर रोड से गुजर रहे थे। सड़क की स्थिति पहले से ही खराब थी—कहीं उखड़ी हुई परत, कहीं अधूरा निर्माण, तो कहीं अचानक ऊंच-नीच। इसी असमानता के बीच अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क पर गिर पड़े। गिरने के बाद उन्हें गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस एक घटना ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया।
स्थानीय लोगों में आक्रोश और शोक
हादसे के बाद गूलर रोड का माहौल पूरी तरह बदल गया। जहां एक ओर शोक की गहरी लहर थी, वहीं दूसरी ओर लोगों के भीतर आक्रोश भी उभर कर सामने आया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह हादसा टाला जा सकता था, अगर समय रहते सड़क निर्माण कार्य को सही तरीके से पूरा किया गया होता। उनका आरोप है कि “सीएम ग्रिड” योजना के तहत जो काम चल रहा है, वह लंबे समय से अधूरा पड़ा है और उसमें गुणवत्ता का भी अभाव है।
अधूरी परियोजनाएं बनीं हादसों की वजह
लोगों का कहना है कि गूलर रोड की हालत किसी खतरे से कम नहीं है। जगह-जगह गड्ढे, टूटी सड़कें और बिना किसी चेतावनी संकेत के अधूरे हिस्से, हर दिन राहगीरों के लिए जोखिम पैदा करते हैं। खासकर रात के समय, जब दृश्यता कम होती है, यह खतरा और भी बढ़ जाता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर जिम्मेदार विभाग अब तक क्यों चुप हैं?
नगर निगम का बयान और बढ़ा विवाद
दूसरी ओर, नगर निगम की ओर से इस मामले में जो प्रतिक्रिया सामने आई है, उसने लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया है। नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने दावा किया कि घटना स्थल पर कोई गड्ढा नहीं था और सड़क का काम लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि हादसे की वजह तेज रफ्तार, अचानक ब्रेक लगाना और हेलमेट न पहनना हो सकता है।
जनता ने उठाए सवाल, जिम्मेदारी से बच रहा प्रशासन?
नगर निगम के इस बयान को स्थानीय लोग सिरे से खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज कर रहा है। लोगों का यह भी कहना है कि अगर सड़क पूरी तरह सही थी, तो फिर यह हादसा कैसे हुआ? क्या हर बार गलती सिर्फ आम नागरिक की ही होती है? क्या प्रशासन अपनी जवाबदेही से बच सकता है?
करणी सेना ने खोला मोर्चा
इसी बीच, इस पूरे मामले में करणी सेना का हस्तक्षेप भी सामने आया है। संगठन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई है। करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष आशीष चौहान (युवा शक्ति ब्रज प्रांत) ने इसे सिस्टम की विफलता बताया और कहा कि यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
वहीं, करणी सेना के एक अन्य प्रदेश अध्यक्ष वीरू भदौरिया ने भी सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर दोषियों को बचाने की कोशिश की गई, तो संगठन चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि चाहे ठेकेदार हो या अधिकारी, किसी को भी जिम्मेदारी से बचने नहीं दिया जाएगा।
आंदोलन की चेतावनी
करणी सेना ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर जल्द ही निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन किया जाएगा। संगठन ने साफ किया कि जनता की जान की कीमत पर किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट
क्या है पूरा मामला? (FAQ)
हादसा कहां हुआ?
यह हादसा अलीगढ़ के गूलर रोड पर हुआ, जहां सड़क की खराब स्थिति बताई जा रही है।
मौत की मुख्य वजह क्या बताई जा रही है?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सड़क की असमानता, जबकि प्रशासन तेज रफ्तार और हेलमेट न पहनने को कारण बता रहा है।
करणी सेना ने क्या कहा?
करणी सेना ने इसे सिस्टम की लापरवाही बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
क्या आंदोलन की चेतावनी दी गई है?
हां, संगठन ने कहा है कि कार्रवाई न होने पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।











