विचार
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मेरी पहली चिट्ठी : जेब नहीं, आत्मा तय करती है सौभाग्य और दुर्भाग्य
सौभाग्य और दुर्भाग्य का असली अर्थ केवल आर्थिक लाभ या हानि तक सीमित नहीं है। यह विचारोत्तेजक लेख आत्मिक संतुष्टि,…
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गलती और इरादे का अंतर : क्यों बुरी नीयत को माफी नहीं, प्रतिकार मिलना चाहिए
-केवल कृष्ण पनगोत्रा गलती और इरादे का अंतर समझना आज के समय की एक बड़ी सामाजिक और नैतिक आवश्यकता है।…
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शब्दों के महल में रहने वाला सबसे गरीब आदमी ; आखिर लेखक और साहित्यकार आर्थिक विपन्न क्यों रहता है?
-अनिल अनूप सभ्यता का इतिहास उठाकर देखिए। जिस समाज ने अपने कवियों, लेखकों और साहित्यकारों को सबसे अधिक सम्मान दिया,…
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वट सावित्री : आस्था के धागों में उलझा प्रकृति का मौन प्रश्न
लेखक : अनिल अनूप सच्ची श्रद्धा केवल माथा टेकने में नहीं होती, बल्कि संरक्षण में होती है। जिस वृक्ष से…
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औकात….? इंसान की हैसियत का सच, समाज का छल और आत्मसम्मान की अंतिम लड़ाई
✍️अनिल अनूप एक शब्द बहुत आसानी से लोगों के जंहा पर चढ़ जाता है – “औकात”। किसी को सपने में…
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मन अटकने का सूफियाना रहस्य : “नदियों पार सजन का थां ना…” और आधुनिक जीवन का आध्यात्मिक सच
लेख : अनिल अनूप प्रस्तुति : रश्मिका शर्मा इंदौरी सूफी संगीत केवल सुरों का संसार नहीं है, बल्कि वह मनुष्य…
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गालों की लाली, आंखों की मस्ती और चाल की लय : नारी-सौंदर्य का गहरा दर्शन
– अनिल अनूप मानव सभ्यता के आरंभ से ही नारी-सौंदर्य केवल आकर्षण का विषय नहीं रहा, बल्कि वह संवेदना, संस्कृति,…
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मेरे देश की धरती : वादियों में बसता स्वर्ग, जहां प्रकृति गाती है और संस्कृति मुस्कराती है
👉 सुनयना परिहार यहां कहानी पलकें खोलकर मुस्कराना चाहती है। इसकी पाजेब में बजते घुंघरू जैसे सदियों से जमे मौन…
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भैंस मासी की उपेक्षा : गौरक्षा की छाया में छिपा एक बड़ा सवाल
अनिल अनूप भारत में जब भी पशुधन, आस्था और कृषि अर्थव्यवस्था की बात होती है, तो सबसे पहले “गाय” का…
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पोस्टरों पर “गौ माता”, थाली में “प्लास्टिक” ; श्रद्धा और व्यवहार के बीच खड़ी असहज सच्चाई
हिमांशु नौरियाल भारत की सांस्कृतिक चेतना में गाय का स्थान केवल एक पशु का नहीं, बल्कि “माता” का है। गाँवों…
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