Lenskart की स्टाइल गाइड पर विवाद गहराया : धार्मिक प्रतीकों को लेकर करणी सेना ने जताई कड़ी आपत्ति
अलीगढ़। चश्मा निर्माण और रिटेल क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Lenskart इन दिनों अपनी कथित आंतरिक “स्टाइल गाइड” को लेकर विवादों में घिर गई है। कंपनी की कर्मचारी ड्रेस और धार्मिक प्रतीकों से संबंधित नीति को लेकर सामाजिक संगठनों ने नाराजगी व्यक्त की है। विशेष रूप से करणी सेना के पदाधिकारियों ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए इसे धार्मिक असमानता से जोड़कर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
पूरा मामला उस समय चर्चा में आया जब सोशल मीडिया पर कंपनी की एक कथित आंतरिक “स्टाइल गाइड” वायरल होने लगी। इसमें दावा किया गया कि कर्मचारियों को तिलक, कलावा और बिंदी जैसे कुछ हिंदू धार्मिक प्रतीकों को पहनने से रोका गया था, जबकि अन्य धार्मिक प्रतीकों जैसे हिजाब और सिख कर्मचारियों की पगड़ी को अनुमति दी गई थी। इस कथित अंतर को लेकर लोगों में नाराजगी फैल गई और देखते ही देखते यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
करणी सेना ने जताया कड़ा विरोध
करणी सेना के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष कुं. गौरव राज सिंह चौहान, युवा शक्ति ब्रज प्रांत अध्यक्ष आशीष चौहान और किसान शक्ति ब्रज प्रांत अध्यक्ष वीरू भदौरिया ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि यदि किसी कंपनी की नीति में धार्मिक पक्षपात की झलक दिखाई देती है तो यह भारतीय समाज की सांस्कृतिक भावना के विरुद्ध माना जाएगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसी नीतियों को जारी रखा गया तो संगठन व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेगा। नेताओं ने यह भी कहा कि भारत जैसे बहुधार्मिक देश में कार्यरत कंपनियों को अपनी नीतियां बनाते समय सामाजिक संतुलन और धार्मिक सम्मान का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस
इस विवाद के सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई लोगों ने कंपनी की कथित नीति को धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताया, जबकि कुछ उपयोगकर्ताओं का कहना था कि कंपनियों को अपने कार्यस्थल के अनुशासन और पेशेवर माहौल को बनाए रखने के लिए ड्रेस कोड तय करने का अधिकार होता है।
हालांकि बहस का मुख्य केंद्र यही रहा कि यदि किसी नीति में अलग-अलग धर्मों के प्रतीकों को लेकर अलग व्यवहार किया जाता है, तो उसे समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
कंपनी की ओर से आई सफाई
विवाद बढ़ने के बाद कंपनी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। कंपनी ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी भी धर्म या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। साथ ही कंपनी ने कहा कि वह सभी कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
कंपनी ने यह भी बताया कि कथित “स्टाइल गाइड” की समीक्षा की जा रही है और जल्द ही नई नीति जारी की जाएगी, जिसमें सभी धर्मों से जुड़े प्रतीकों को समान रूप से स्वीकार करने की बात कही गई है।
व्यापारिक जगत में भी उठे सवाल
यह मामला केवल सामाजिक स्तर तक सीमित नहीं रहा बल्कि व्यापारिक जगत में भी इस पर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रांड छवि किसी भी कंपनी की सबसे बड़ी पूंजी होती है और इस प्रकार के विवाद ग्राहकों के विश्वास को प्रभावित कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार कंपनियों को अपनी नीतियां बनाते समय स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए ताकि इस प्रकार के विवादों से बचा जा सके।
धार्मिक स्वतंत्रता बनाम कॉर्पोरेट नीति
इस पूरे विवाद ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा किया है कि क्या निजी कंपनियों की आंतरिक नीतियां कर्मचारियों की धार्मिक स्वतंत्रता से ऊपर हो सकती हैं या नहीं। संविधान नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है, वहीं कंपनियों को भी कार्यस्थल अनुशासन बनाए रखने का अधिकार होता है।
ऐसे में दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना ही सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है। विशेषज्ञों का मानना है कि संवाद और संतुलित नीति ही ऐसे विवादों का स्थायी समाधान हो सकती है।
आगे क्या हो सकता है?
करणी सेना ने स्पष्ट किया है कि वह इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और यदि भविष्य में इस प्रकार की कोई नीति दोबारा सामने आती है तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। वहीं कंपनी ने नई स्टाइल गाइड जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जिससे विवाद को शांत करने की कोशिश की जा रही है।
📌 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या Lenskart की स्टाइल गाइड में धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाई गई थी?
सोशल मीडिया पर वायरल दस्तावेजों में ऐसा दावा किया गया था, हालांकि कंपनी ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि वह सभी धर्मों का सम्मान करती है और नई नीति तैयार की जा रही है।
करणी सेना ने इस मामले में क्या कहा?
करणी सेना नेताओं ने कथित नीति को धार्मिक असमानता से जोड़ते हुए विरोध जताया और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
क्या कंपनी ने माफी मांगी है?
विवाद बढ़ने के बाद कंपनी ने सफाई जारी की और कहा कि वह नई स्टाइल गाइड जारी कर सभी धर्मों के प्रतीकों को समान रूप से स्वीकार करेगी।
इस विवाद का असर कंपनी की छवि पर पड़ सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवाद ब्रांड छवि को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए कंपनियों को संतुलित और संवेदनशील नीति अपनानी चाहिए।











