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पूर्वांचल की राजनीति में नए समीकरण का आगाज, 2027 विधानसभा चुनाव के लिए तीसरे मोर्चे ने भरी हुंकार

इरफान अली लारी की रिपोर्ट

पूर्वांचल की राजनीतिक सरगर्मियों के बीच क्षेत्रीय दलों के एकजुट होने की कवायद अब खुलकर सामने आने लगी है। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। इसी क्रम में पूर्वांचल भागीदारी संकल्प मोर्चा की एक विशाल राजनीतिक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में विभिन्न दलों के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भाग लेकर आगामी चुनावी रणनीति पर मंथन किया। इस महत्वपूर्ण बैठक में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल की 40 सीटों पर प्रभावी जीत दर्ज करने का लक्ष्य तय किया गया।

राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही यह बैठक कुशीनगर जनपद में आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजन सिंह सूर्यबंशी ने की। सभा में सैकड़ों की संख्या में मौजूद कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूरे कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह और जोश देखने को मिला, जिसने साफ संकेत दिया कि यह मोर्चा आगामी चुनावों में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी में है।

बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय संस्थागारिक पार्टी (रासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर मनोज सिंह सैंथवार ने कहा कि कुशीनगर की यह पवित्र भूमि केवल धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि राजनीतिक चेतना के केंद्र के रूप में भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की तपोस्थली और प्राचीन मल्ल महाजनपद की धरती से तीसरे मोर्चे का औपचारिक शंखनाद हो चुका है।

उन्होंने कहा कि पूर्वांचल भागीदारी संकल्प मोर्चा किसी एक दल या व्यक्ति का मंच नहीं, बल्कि क्षेत्रीय अस्मिता, सामाजिक न्याय और राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने का साझा अभियान है। उन्होंने दावा किया कि यदि सभी सहयोगी दल पूरी मजबूती और एकजुटता के साथ कार्य करें, तो आगामी विधानसभा चुनाव 2027 में पूर्वांचल क्षेत्र से कम से कम 40 विधायक विधानसभा पहुंचाने का लक्ष्य पूरी तरह संभव है।

अपने संबोधन में इंजीनियर मनोज सिंह सैंथवार ने कहा कि लंबे समय से पूर्वांचल क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से अपेक्षित लाभ नहीं प्राप्त कर सका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में आने वाले दलों ने चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। ऐसे में क्षेत्रीय दलों की जिम्मेदारी है कि वे जनता की वास्तविक आवाज बनकर सामने आएं।

बैठक में प्रयागराज सहित पूर्वांचल के कई जिलों से पहुंचे प्रमुख नेताओं और पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे। इनमें संजय पांडे, बी.एन. चौहान, जनार्दन चौहान, बजरंगी पांडे, रामकिशन सिंह, सुनील श्रीवास्तव, विजय यादव और अरुण वास्तव प्रमुख रूप से शामिल रहे। इसके अलावा ध्रुव नारायण सिंह, नीतिश सिंह, रामरक्षा सिंह और श्रवण कुमार सिंह सहित अनेक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को और प्रभावशाली बना दिया।

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि पूर्वांचल के युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वर्तमान परिस्थितियों में बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में महानगरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। यदि क्षेत्र में उद्योग, व्यापार और स्वरोजगार के अवसर विकसित किए जाएं, तो पलायन की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है।

किसानों की समस्याओं को लेकर भी नेताओं ने गंभीर चिंता व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। सिंचाई, खाद, बीज और कृषि ऋण से जुड़ी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। मोर्चे ने किसानों के हितों की रक्षा को अपने प्रमुख एजेंडे में शामिल करने की बात कही।

बैठक में सामाजिक समरसता और राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि जब तक समाज के सभी वर्ग एक मंच पर नहीं आएंगे, तब तक व्यापक राजनीतिक परिवर्तन संभव नहीं है। पूर्वांचल भागीदारी संकल्प मोर्चा सामाजिक समावेशिता और समान अवसर के सिद्धांत पर आगे बढ़ने का संकल्प लेकर चल रहा है।

सभा के दौरान कई वक्ताओं ने स्थानीय समस्याओं जैसे सड़क, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं की कमी का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जिसे दूर करने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी सहयोगी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से संकल्प लिया कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में साझा रणनीति के तहत एकजुट होकर मैदान में उतरेंगे। इसके लिए बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और जनसंपर्क अभियान चलाने पर सहमति बनी।

बैठक शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई। आयोजन में मौजूद कार्यकर्ताओं का उत्साह यह दर्शाता है कि पूर्वांचल भागीदारी संकल्प मोर्चा क्षेत्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह मोर्चा अपनी संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने और जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने में सफल रहता है, तो आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में पूर्वांचल की राजनीति में एक नया अध्याय लिख सकता है। यह बैठक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

 

❓ जरूरी सवाल-जवाब

यह बैठक कहाँ आयोजित की गई थी?

यह बैठक उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद में आयोजित की गई थी।

बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?

बैठक का उद्देश्य पूर्वांचल के क्षेत्रीय दलों को एकजुट कर आगामी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए रणनीति बनाना था।

मोर्चा ने चुनाव के लिए क्या लक्ष्य तय किया?

पूर्वांचल भागीदारी संकल्प मोर्चा ने 2027 विधानसभा चुनाव में 40 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है।

बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?

बैठक में रोजगार, किसानों की समस्याएं, क्षेत्रीय विकास और सामाजिक समरसता जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

क्या सभी दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे?

हाँ, सभी दलों ने संयुक्त रणनीति के साथ एकजुट होकर चुनाव लड़ने का संकल्प लिया है।

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