22 अक्टूबर 2026 7:53 पूर्वाह्न

ब्रज रज उत्सव 2026 : हेमा मालिनी की ‘गंगा’ से होगा सांस्कृतिक महोत्सव का आगाज, वृंदावन में पहली बार सजेगा भव्य मंच

ब्रज रज उत्सव 2026 की फीचर इमेज में हेमा मालिनी की गंगा नृत्य नाटिका, मथुरा-वृंदावन का सांस्कृतिक मंच और रिपोर्टर ठाकुर कृष्णकांत सिंह।

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रिपोर्ट: ठाकुर कृष्णकांत सिंह

मथुरा: ब्रज की सांस्कृतिक विरासत, भक्ति संगीत, लोककलाओं और पारंपरिक जीवनशैली की रंगीन छटा बिखेरने के लिए ब्रज रज उत्सव 2026 का मंच सजने जा रहा है। 23 अक्टूबर से 2 नवंबर तक आयोजित होने वाले इस 11 दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव में देश के जाने-माने कलाकारों की प्रस्तुतियां दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेंगी। उत्सव का शुभारंभ प्रख्यात अभिनेत्री और मथुरा की सांसद हेमा मालिनी की नृत्य नाटिका ‘गंगा’ से होगा। इस बार आयोजन की खास बात यह है कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का विस्तार वृंदावन तक किया गया है, जहां पहली बार नवनिर्मित स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह में कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। वहीं, धौलीप्याऊ स्थित रेलवे ग्राउंड पर संगीत, भजन, लोककला और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियां पूरे उत्सव के दौरान लोगों को आकर्षित करेंगी।

हेमा मालिनी की नृत्य नाटिका ‘गंगा’ से होगी शुरुआत

ब्रज रज उत्सव 2026 के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का पहला बड़ा आकर्षण हेमा मालिनी की विशेष नृत्य नाटिका ‘गंगा’ होगी। 23 अक्टूबर को शाम छह बजे वृंदावन स्थित स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह में इस प्रस्तुति का आयोजन किया जाएगा। अपनी नृत्य प्रस्तुतियों के लिए विशेष पहचान रखने वाली हेमा मालिनी के इस कार्यक्रम को लेकर दर्शकों में उत्सुकता रहने की उम्मीद है। गंगा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करने वाली यह नाटिका उत्सव की शुरुआत को विशिष्ट बनाएगी।

हेमा मालिनी ने ब्रजवासियों को इस आयोजन में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उन्होंने अपनी प्रस्तुति का उल्लेख करते हुए लोगों से 23 अक्टूबर की शाम छह बजे स्वामी हरिदास ऑडिटोरियम पहुंचने की अपील की है। उनकी यह अपील उत्सव के पहले दिन वृंदावन में होने वाले सांस्कृतिक आयोजन को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ाने वाली है।

ब्रज रज उत्सव में हेमा मालिनी की प्रस्तुति केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को सामने लाने का अवसर भी होगी। ब्रज की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान और आसपास के क्षेत्रों की आध्यात्मिक परंपराओं के बीच इस तरह की प्रस्तुतियां उत्सव के स्वरूप को और व्यापक बनाती हैं।

पहली बार वृंदावन में भी होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम

इस वर्ष ब्रज रज उत्सव की एक महत्वपूर्ण विशेषता वृंदावन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन है। स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह को इस बार प्रमुख प्रस्तुतियों के लिए चुना गया है। इससे उत्सव का दायरा केवल एक आयोजन स्थल तक सीमित न रहकर ब्रज क्षेत्र के दूसरे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र तक पहुंचेगा। वृंदावन की धार्मिक पहचान, संगीत और भक्ति परंपरा के अनुरूप यहां होने वाले कार्यक्रम दर्शकों को अलग तरह का सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करेंगे।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 25 अक्टूबर को अभिनेता सौरभ राज जैन की नाट्य प्रस्तुति ‘मेरे कृष्ण’ आयोजित होगी। 26 अक्टूबर को गीता शोध संस्थान की ओर से रासलीला प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद 27 अक्टूबर को शिवानी मिश्रा की ‘कलर्स ऑफ यूपी’ प्रस्तुति होगी। इन कार्यक्रमों में कृष्णभक्ति, ब्रज की परंपराओं और उत्तर प्रदेश की विविध सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की झलक देखने को मिलेगी।

वृंदावन में इन आयोजनों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह क्षेत्र भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, रास परंपरा, मंदिर संस्कृति और भक्ति संगीत के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। ऐसे वातावरण में नाट्य प्रस्तुति, रासलीला और लोक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संयोजन ब्रज रज उत्सव को विशिष्ट पहचान देने में सहायक हो सकता है।

धौलीप्याऊ रेलवे ग्राउंड पर संगीत और भजनों की धूम

ब्रज रज उत्सव का दूसरा प्रमुख केंद्र मथुरा के धौलीप्याऊ स्थित रेलवे ग्राउंड पर रहेगा। यहां 24 अक्टूबर से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के जरिए संगीत, भक्ति और लोककला की विविधता को सामने रखेंगे। आयोजकों की योजना के अनुसार, यहां प्रतिदिन कार्यक्रमों के साथ स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।

रेलवे ग्राउंड पर दोपहर तीन बजे से शाम सात बजे तक स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों के लिए समय निर्धारित किया गया है। इससे क्षेत्रीय प्रतिभाओं को बड़े आयोजन में मंच मिल सकेगा। ब्रज की लोकपरंपराओं, भजन गायन और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में स्थानीय कलाकारों की भूमिका अहम है। उन्हें दर्शकों के सामने अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर देना उत्सव को जनभागीदारी से जोड़ने वाला कदम है।

धौलीप्याऊ के कार्यक्रमों में सूफी गायन, भजन, संगीत बैंड, नौटंकी और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल हैं। इस विविधता के कारण उत्सव में अलग-अलग आयु वर्ग और रुचियों वाले दर्शकों के लिए आकर्षण रहेगा। धार्मिक आस्था से जुड़े कार्यक्रमों के साथ आधुनिक संगीत प्रस्तुतियों का समावेश आयोजन को व्यापक सांस्कृतिक स्वरूप प्रदान करेगा।

ब्रज रज उत्सव 2026: प्रमुख कार्यक्रमों की तारीखें

उत्सव के दौरान वृंदावन स्थित स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह और धौलीप्याऊ रेलवे ग्राउंड पर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। दर्शक अपनी रुचि के अनुसार प्रस्तुतियों की तारीख और स्थल देखकर कार्यक्रम में शामिल होने की योजना बना सकते हैं। घोषित सांस्कृतिक कार्यक्रमों का विवरण इस प्रकार है:

  • 23 अक्टूबर: हेमा मालिनी की नृत्य नाटिका ‘गंगा’ — शाम छह बजे, स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह, वृंदावन।
  • 24 अक्टूबर: ईशान मिश्रा का सूफी गायन — धौलीप्याऊ रेलवे ग्राउंड।
  • 25 अक्टूबर: सौरभ राज जैन की नाट्य प्रस्तुति ‘मेरे कृष्ण’ — स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह, वृंदावन। इसी दिन रसिक वैष्णव का ‘ब्रज रस’ भजन कॉन्सर्ट — धौलीप्याऊ रेलवे ग्राउंड।
  • 26 अक्टूबर: गीता शोध संस्थान की रासलीला — स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह, वृंदावन। रूट्स नादात्म बैंड की संगीत प्रस्तुति — धौलीप्याऊ रेलवे ग्राउंड।
  • 27 अक्टूबर: शिवानी मिश्रा की ‘कलर्स ऑफ यूपी’ — स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह, वृंदावन। गजेंद्र प्रताप सिंह की भजन क्लबिंग प्रस्तुति — धौलीप्याऊ रेलवे ग्राउंड।
  • 28 अक्टूबर: ईशिता विश्वकर्मा की भजन प्रस्तुति — धौलीप्याऊ रेलवे ग्राउंड।
  • 29 अक्टूबर: लखवीर सिंह लक्खा की भजन प्रस्तुति — धौलीप्याऊ रेलवे ग्राउंड।
  • 30 अक्टूबर: अतुल पंडित की सांस्कृतिक प्रस्तुति — धौलीप्याऊ रेलवे ग्राउंड।
  • 31 अक्टूबर: पद्मश्री रामदयाल की नौटंकी — धौलीप्याऊ रेलवे ग्राउंड।
  • 1 नवंबर: अभय विश्वकर्मा का म्यूजिकल बैंड — धौलीप्याऊ रेलवे ग्राउंड।
  • 2 नवंबर: बैक स्टेज सिवलिंग की संगीत प्रस्तुति — धौलीप्याऊ रेलवे ग्राउंड।

यह कार्यक्रम सूची उत्सव में शामिल कलाकारों और प्रस्तुतियों की विविधता को दर्शाती है। वृंदावन में जहां नृत्य नाटिका, कृष्णकथा आधारित नाट्य प्रस्तुति और रासलीला पर जोर रहेगा, वहीं धौलीप्याऊ रेलवे ग्राउंड पर भजन, सूफी संगीत, बैंड और लोकमंच की प्रस्तुतियां प्रमुख रहेंगी। कार्यक्रमों के समय और प्रवेश संबंधी अतिरिक्त जानकारी के लिए दर्शकों को आयोजकों की आधिकारिक घोषणाओं पर ध्यान देना चाहिए।

शिल्प, हस्तकला और पारंपरिक व्यंजन भी होंगे आकर्षण

ब्रज रज उत्सव 2026 का उद्देश्य केवल मंचीय प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं है। आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले शिल्प एवं हस्तकला उत्पादों की प्रदर्शनी, क्षेत्रीय व्यंजनों और ब्रज के पारंपरिक खानपान की व्यवस्था भी रहेगी। इसके साथ मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियां लोगों को उत्सव के माहौल से जोड़ेंगी। इस तरह आगंतुकों को एक ही स्थान पर कला, संस्कृति, खानपान और मनोरंजन का अनुभव मिल सकेगा।

विभिन्न राज्यों के हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पाद स्थानीय कारीगरों तथा छोटे व्यवसायों की कला को व्यापक पहचान दिलाने का माध्यम बन सकते हैं। वहीं, अलग-अलग क्षेत्रों के व्यंजनों के जरिए देश की खानपान परंपराओं की विविधता सामने आएगी। ब्रज का पारंपरिक भोजन भी इस आयोजन में स्थानीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करेगा। ऐसे आयोजन सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के लिए भी अवसर तैयार कर सकते हैं।

ब्रज की विरासत और पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर

उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद, जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव का मकसद ब्रज की सांस्कृतिक विरासत, लोककलाओं और परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाना है। परिषद की मुख्य कार्यपालक अधिकारी लक्ष्मी नागप्पन के अनुसार, ब्रज रज उत्सव के माध्यम से क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और पर्यटन को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इस बार देश के प्रख्यात कलाकारों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण रहेंगी। पहली बार वृंदावन स्थित स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। इसके अतिरिक्त विभिन्न राज्यों के शिल्प, हस्तकला और पारंपरिक व्यंजनों के माध्यम से आगंतुकों को देश की विविध कला एवं संस्कृति से परिचित कराया जाएगा।

ब्रज क्षेत्र की पहचान मंदिरों, धार्मिक स्थलों और श्रीकृष्ण से जुड़ी परंपराओं के साथ-साथ लोकगीतों, रासलीला, पारंपरिक कलाओं और उत्सवों से भी बनती है। ब्रज रज उत्सव इन सभी सांस्कृतिक पक्षों को एक मंच पर लाने का प्रयास है। वृंदावन और मथुरा में कार्यक्रमों का आयोजन आगंतुकों को दोनों स्थानों की सांस्कृतिक विशेषताओं से परिचित होने का अवसर देगा।

11 दिनों तक संस्कृति, भक्ति और मनोरंजन का संगम

23 अक्टूबर से 2 नवंबर तक चलने वाला ब्रज रज उत्सव 2026 ब्रजवासियों और यहां आने वाले पर्यटकों के लिए सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर लेकर आ रहा है। हेमा मालिनी की ‘गंगा’ से होने वाली शुरुआत, सौरभ राज जैन की ‘मेरे कृष्ण’, रासलीला, ‘कलर्स ऑफ यूपी’, भजन संध्याएं, सूफी गायन और लोकमंच की प्रस्तुतियां इस आयोजन को विविधता प्रदान करेंगी। शिल्प, हस्तकला और पारंपरिक खानपान की मौजूदगी उत्सव के अनुभव को और व्यापक बनाएगी।

इस महोत्सव की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि स्थानीय कलाकारों को मिलने वाला मंच कितना प्रभावी साबित होता है और आगंतुक ब्रज की सांस्कृतिक परंपराओं से किस तरह जुड़ते हैं। यदि कार्यक्रमों के माध्यम से लोककलाओं, पारंपरिक संगीत और हस्तशिल्प को नई पहचान मिलती है, तो ब्रज रज उत्सव पर्यटन के साथ सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में भी उपयोगी भूमिका निभा सकता है। फिलहाल, 23 अक्टूबर को वृंदावन में हेमा मालिनी की नृत्य नाटिका ‘गंगा’ के साथ इस 11 दिवसीय सांस्कृतिक यात्रा का आगाज होने जा रहा है।

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