21 अक्टूबर 2026 10:20 अपराह्न

सुरों में फिर जीवंत हुईं सदाबहार धुनें, संगीतप्रेमियों ने याद की अमर विरासत

रवीन्द्र जैन की संगीत विरासत को समर्पित कराओके शो-3 में शामिल कलाकारों का समूह, संगीत कार्यक्रम और रिपोर्टर शामी एम. इरफान की तस्वीर।

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शामी एम. इरफान की रिपोर्ट

भारतीय फिल्म संगीत की दुनिया में कुछ धुनें ऐसी होती हैं, जो समय बीतने के साथ पुरानी नहीं पड़तीं, बल्कि हर पीढ़ी के दिल में अपनी जगह बनाती रहती हैं। ऐसी ही अमर संगीत विरासत को याद करने और सुरों के माध्यम से उसे फिर से जीवंत करने के उद्देश्य से एक विशेष कराओके कार्यक्रम का आयोजन किया गया। करीब तीन घंटे तक चले इस संगीतमय आयोजन में महान संगीतकार पद्मश्री रवीन्द्र जैन के लोकप्रिय गीतों ने श्रोताओं को भावनाओं, यादों और संगीत की खूबसूरत दुनिया से जोड़ दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों, सम्मान समारोह और एक नए संगीत एल्बम के लोकार्पण ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

संगीत की यादों के नाम रहा खास आयोजन

संस्कृति प्रोडक्शन हाउस और बिग बैड क्रिएटर्स के संयुक्त तत्वावधान में कराओके शो-3 का आयोजन रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के चार बंगला, अंधेरी पश्चिम स्थित संस्कृति बंगला में किया गया। इस कार्यक्रम को पद्मश्री रवीन्द्र जैन की मधुर स्मृति को समर्पित किया गया था। आयोजन का मुख्य उद्देश्य उनकी संगीत साधना और सदाबहार रचनाओं को याद करना तथा उन धुनों को कलाकारों और संगीतप्रेमियों के बीच दोबारा प्रस्तुत करना था, जिन्होंने लंबे समय तक हिंदी संगीत जगत को समृद्ध किया है।

कार्यक्रम में आमंत्रित अतिथियों और संगीतप्रेमियों की अच्छी भागीदारी देखने को मिली। लगभग तीन घंटे तक चले इस आयोजन में गायकों ने एक के बाद एक प्रस्तुतियां देकर वातावरण को संगीतमय बनाए रखा। श्रोताओं के लिए यह अवसर केवल गीत सुनने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन धुनों के साथ जुड़ी स्मृतियों को फिर से महसूस करने का भी था, जो आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं।

रवीन्द्र जैन की धुनों पर केंद्रित रहीं प्रस्तुतियां

कराओके शो-3 की सबसे उल्लेखनीय बात इसकी स्पष्ट संगीत-थीम रही। कार्यक्रम में केवल उन्हीं गीतों को चुना गया, जिनका संगीत संयोजन रवीन्द्र जैन ने किया था। इस चयन ने आयोजन को एक विशिष्ट पहचान दी और इसे सामान्य गीत-संगीत कार्यक्रम से अलग बनाया। प्रस्तुति के लिए चुनी गई रचनाओं में रवीन्द्र जैन के स्वयं लिखे गीतों के साथ-साथ दूसरे प्रतिष्ठित गीतकारों के लिखे गीत भी शामिल थे।

इन्द्रजीत तुलसी, साहिर लुधियानवी और आनंद बख्शी जैसे गीतकारों की रचनाओं को भी रवीन्द्र जैन की धुनों के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। इससे यह बात सामने आई कि एक संगीतकार की रचनात्मकता केवल उसके अपने लिखे गीतों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह दूसरे गीतकारों के शब्दों को भी अपनी धुनों के माध्यम से अलग पहचान दे सकता है। कार्यक्रम में सुनाई दीं इन रचनाओं ने श्रोताओं को गीतों के शब्द, संगीत और गायन के आपसी तालमेल का अनुभव कराया।

कलाकारों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

कार्यक्रम में रवि जैन, रवि दानिश, रीना अग्रवाल, राजवी खान, शाहनवाज, यूनुस मिर्जा, कृष्णा राठौर, रचना वर्तक, भूमि जनबंधू, जोया खान और संस्कृति ने अपनी गायकी से श्रोताओं का मनोरंजन किया। सभी कलाकारों ने रवीन्द्र जैन की संगीत विरासत से जुड़ी रचनाओं को प्रस्तुत कर आयोजन के मूल भाव को बनाए रखा।

इन प्रस्तुतियों के दौरान सभागार में संगीत का माहौल बना रहा। सदाबहार धुनों ने श्रोताओं को उन गीतों की याद दिलाई, जिनकी लोकप्रियता समय के साथ कायम रही है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने गायकों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया और आयोजन को संगीत के प्रति अपने लगाव को साझा करने का अवसर बनाया। कलाकारों की सहभागिता ने यह भी दिखाया कि पुरानी और लोकप्रिय संगीत रचनाओं को नए मंचों पर प्रस्तुत करने से वे आज के श्रोताओं तक भी पहुंच सकती हैं।

प्रमुख कलाकारों को किया गया सम्मानित

संगीत प्रस्तुतियों के साथ कार्यक्रम में कलाकारों के सम्मान का विशेष आयोजन भी हुआ। गायक-संगीतकार रवि जैन, गायक रवि दानिश, गायक शाहनवाज, गायिका राजवी खान तथा अभिनेत्री एवं गायिका रीना अग्रवाल को जितेन्द्र शर्मा और रूपाली शर्मा ने शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस सम्मान के माध्यम से कलाकारों के योगदान और संगीत के क्षेत्र में उनकी सहभागिता को महत्व दिया गया।

सम्मान समारोह ने आयोजन को एक औपचारिक और भावनात्मक आयाम दिया। संगीत की प्रस्तुतियों के बीच कलाकारों का सम्मान इस बात का प्रतीक रहा कि किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रम की सफलता में मंच पर प्रस्तुति देने वाले लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे आयोजन कलाकारों को प्रोत्साहित करने और संगीत की परंपरा को आगे बढ़ाने में भी योगदान देते हैं।

‘जय जगदीश्वरी’ के नए संस्करण का लोकार्पण

कराओके शो-3 का एक प्रमुख आकर्षण ‘जय जगदीश्वरी’ के रिक्रिएटेड एल्बम का लोकार्पण रहा। इस गीत का मूल गीत और संगीत पद्मश्री रवीन्द्र जैन का है। इसके नए संस्करण को रवि जैन ने रिक्रिएट किया है और अपनी आवाज में प्रस्तुत किया है। इस पहल के माध्यम से मूल रचना को नए संगीत संयोजन और नई प्रस्तुति के साथ श्रोताओं के सामने लाने का प्रयास किया गया।

किसी पुरानी और लोकप्रिय संगीत रचना को नए रूप में प्रस्तुत करना अपने आप में रचनात्मक जिम्मेदारी का काम है। इसमें मूल रचना की पहचान और उसके भाव को बनाए रखते हुए नई प्रस्तुति के अनुरूप संगीत संयोजन करना होता है। ‘जय जगदीश्वरी’ के रिक्रिएटेड एल्बम का लोकार्पण इसी दृष्टि से कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। इससे रवीन्द्र जैन की संगीत विरासत को नए श्रोताओं तक पहुंचाने की पहल को भी मंच मिला।

आयोजन और संचालन में रही शामी एम. इरफान की भूमिका

कार्यक्रम का संचालन और आयोजन शामी एम. इरफान ने किया। आयोजन के समापन पर उन्होंने जितेन्द्र शर्मा को मंच पर आमंत्रित किया, जिन्होंने उपस्थित लोगों और कार्यक्रम से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के सफल संयोजन में सनी कपूर और कृष्णा गौतम की विशेष भूमिका रही। आयोजन से जुड़े लोगों के सामूहिक प्रयास ने प्रस्तुतियों, सम्मान समारोह और एल्बम लोकार्पण को एक ही मंच पर सुव्यवस्थित ढंग से आयोजित करने में सहयोग दिया।

कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों और संगीतप्रेमियों की सहभागिता ने आयोजन को जीवंत बनाए रखा। कलाकारों की प्रस्तुतियों से लेकर सम्मान समारोह तक, कार्यक्रम के विभिन्न हिस्सों ने एक साझा उद्देश्य को सामने रखा—रवीन्द्र जैन की संगीत साधना को याद करना और उनकी रचनाओं के प्रति लोगों के जुड़ाव को बनाए रखना।

नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है संगीत विरासत

कराओके शो-3 ने यह संदेश दिया कि महान संगीतकारों की रचनाओं को जीवंत बनाए रखने के लिए उन्हें बार-बार सुनना, प्रस्तुत करना और नई पीढ़ी से परिचित कराना आवश्यक है। रवीन्द्र जैन की धुनों पर आधारित प्रस्तुतियों और ‘जय जगदीश्वरी’ के नए संस्करण के लोकार्पण ने इसी उद्देश्य को रेखांकित किया। संगीत की दुनिया में किसी रचना की स्थायी लोकप्रियता उसकी धुन, शब्दों और भावनात्मक प्रभाव से बनती है, और ऐसी रचनाएं समय के साथ नए श्रोताओं को भी आकर्षित करती रहती हैं।

मुंबई में आयोजित यह संगीत संध्या रवीन्द्र जैन की स्मृति को समर्पित एक ऐसा मंच बनी, जहां कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए उनकी रचनात्मक विरासत को सम्मान दिया। संस्कृति प्रोडक्शन हाउस और बिग बैड क्रिएटर्स की इस पहल ने सदाबहार गीतों को फिर से मंच पर लाने तथा संगीतप्रेमियों को एक साझा सांस्कृतिक अनुभव देने का प्रयास किया। इस तरह कराओके शो-3 केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि भारतीय संगीत की एक समृद्ध परंपरा को याद करने और आगे बढ़ाने का अवसर भी बना।

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