20 अक्टूबर 2026 11:58 पूर्वाह्न

माँ की ऐसी ममता ❓45 दिन के बेटे को डेढ़ लाख में बेचकर रची अपहरण की कहानी!

कासगंज में 45 दिन के नवजात को कथित तौर पर बेचने और अपहरण की झूठी कहानी रचने के मामले पर फीचर इमेज, रिपोर्टर इरफान अली लारी के साथ मां-बच्चे का सांकेतिक दृश्य और पुलिस कार्रवाई।

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इरफान अली लारी की रिपोर्ट
जनगणदूत.कॉम | उत्तर प्रदेश

कासगंज, उत्तर प्रदेश। मां की ममता को दुनिया का सबसे अनमोल रिश्ता माना जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के कासगंज से सामने आया एक मामला इस रिश्ते को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि महज 45 दिन के अपने बेटे को दूसरे दंपती को सौंपने के बाद एक महिला ने उसके अपहरण की कहानी सुना दी। शुरुआत में मामला बस स्टैंड से नवजात के लापता होने का लगा, लेकिन पुलिस जांच के दौरान बैंक खाते में आई रकम ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया। पुलिस का दावा है कि बच्चे को कथित तौर पर 1.30 लाख रुपये में सौंपा गया था।

कासगंज नवजात बच्चा बेचने का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने बच्चे की तलाश शुरू की। जांच के दौरान बच्चे की मां क्रांति के बयानों पर संदेह हुआ और उसके बैंक खाते की पड़ताल की गई। इसके बाद कथित सौदे की जानकारी सामने आई। पुलिस ने नवजात को हाथरस जिले के सिकंदराराऊ क्षेत्र से बरामद कर लिया है। मामले में बच्चे की मां और एक झोलाछाप दंपती को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि बच्चे को कथित तौर पर लेने वाले दंपती की तलाश की जा रही है।

बरामदगी के बाद नवजात की तबीयत ठीक नहीं मिलने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह मामला केवल बच्चे के लापता होने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बाल सुरक्षा, कथित अवैध लेनदेन और परिवार के भीतर बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। हालांकि, पुलिस के आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

बस स्टैंड पर बच्चा गायब होने की सुनाई गई कहानी

मामला कासगंज जिले के सोरों थाना क्षेत्र के बनूपुर पुख्ता गांव का है। यहां रहने वाले अरविंद फरीदाबाद की एक कंपनी में काम करते हैं। उनकी पत्नी क्रांति अपने तीन बच्चों के साथ गांव में रहती थी। परिवार का सबसे छोटा बच्चा महज 45 दिन का था। इतनी कम उम्र के नवजात के अचानक लापता होने की खबर से परिवार में चिंता फैल गई।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 16 अक्टूबर को क्रांति अपने सबसे छोटे बेटे को दवा दिलाने के बहाने कासगंज पहुंची थी। पुलिस के मुताबिक, दोपहर करीब तीन बजे वह कासगंज रोडवेज बस स्टैंड पर थी। उसने कथित तौर पर लघुशंका जाने की बात कहकर बच्चे को एक अज्ञात महिला के पास छोड़ दिया। क्रांति का कहना था कि जब वह वापस लौटी तो वहां न वह महिला मिली और न ही उसका बच्चा।

इसके बाद उसने 1076 नंबर पर फोन करके बच्चे के लापता होने की सूचना दी। घर पहुंचकर भी उसने परिजनों को यही बात बताई। शुरुआत में यह घटना किसी अज्ञात महिला द्वारा बच्चे को ले जाने की आशंका से जुड़ी दिखाई दी। परिवार के लिए यह बेहद परेशान करने वाला घटनाक्रम था, क्योंकि नवजात की उम्र इतनी कम थी कि वह अपनी सुरक्षा के लिए खुद कुछ नहीं कर सकता था।

हालांकि, पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए घटनाक्रम की जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने के साथ महिला के बयान और परिस्थितियों को लेकर सवाल उठने लगे। इसके बाद पुलिस ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की।

पिता की शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की गहन जांच

बच्चे के लापता होने की सूचना मिलने के बाद अरविंद फरीदाबाद से गांव पहुंचे। उन्होंने 17 अक्टूबर को पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने बच्चे की तलाश के साथ-साथ घटना से संबंधित लोगों के बयान और उपलब्ध जानकारी की जांच की। पूछताछ के दौरान क्रांति के जवाबों में कथित तौर पर विरोधाभास सामने आए। इससे पुलिस का संदेह बढ़ गया।

जांच के दौरान पुलिस ने क्रांति के बैंक खाते की जानकारी जुटाई। पुलिस के मुताबिक, खाते में 1.30 लाख रुपये आने का पता चला। रकम के इस लेनदेन ने जांच को नई दिशा दी। पुलिस ने महिला से दोबारा पूछताछ की और दावा किया कि इसी दौरान बच्चे को दूसरे लोगों को सौंपने के बदले रुपये लेने की बात सामने आई।

पुलिस के अनुसार, कथित सौदे में 1.20 लाख रुपये ऑनलाइन भेजे गए थे, जबकि 10 हजार रुपये नकद दिए गए। इस तरह कुल रकम 1.30 लाख रुपये बताई गई। जिस मामले की शुरुआत नवजात के अपहरण की शिकायत से हुई थी, उसमें अब कथित तौर पर बच्चे को रुपये लेकर सौंपने का आरोप सामने आया।

बैंक खाते में रकम आने की जानकारी इस जांच का महत्वपूर्ण पहलू बन गई। हालांकि, केवल बैंक लेनदेन के आधार पर पूरे घटनाक्रम का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। रकम किसने भेजी, उसका उद्देश्य क्या था और उसमें शामिल व्यक्तियों की वास्तविक भूमिका क्या रही, इन सभी बिंदुओं की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होनी है।

झोलाछाप दंपती पर बच्चे को दूसरे परिवार तक पहुंचाने का आरोप

कासगंज नवजात बच्चा बेचने का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने कथित सौदे की पूरी कड़ी को समझने का प्रयास किया। पुलिस के मुताबिक, सोरों क्षेत्र के सलेमपुर उर्फ नगला भूतल निवासी अरुण और उसकी पत्नी पिंकी की भूमिका सामने आई। दोनों के झोलाछाप के रूप में काम करने की जानकारी दी गई है। आरोप है कि उन्होंने क्रांति के साथ मिलकर नवजात को सिकंदराराऊ निवासी महीपाल और उसकी पत्नी संतोषी तक पहुंचाया।

पुलिस ने पूछताछ के आधार पर अरुण और पिंकी को गिरफ्तार किया। इसके बाद उनसे मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम हाथरस जिले के सिकंदराराऊ पहुंची। वहां से 45 दिन के बच्चे को बरामद कर लिया गया। इस कार्रवाई के बाद बच्चे के परिवार को उसके मिलने की खबर मिली, लेकिन मामले के अन्य पहलुओं की जांच अभी बाकी है।

पुलिस के अनुसार, बच्चे को कथित तौर पर लेने वाला दंपती पुलिस के पहुंचने से पहले ही वहां से फरार हो गया था। अब महीपाल और संतोषी की तलाश की जा रही है। जांच एजेंसियों के सामने कथित सौदे में शामिल सभी व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट करने, रुपये के लेनदेन की पुष्टि करने और फरार आरोपियों तक पहुंचने की चुनौती है।

बरामदगी के बाद बिगड़ी मिली नवजात की तबीयत

पुलिस ने बच्चे को बरामद करने के बाद उसकी स्थिति की जानकारी ली। उपलब्ध विवरण के अनुसार, नवजात की तबीयत ठीक नहीं मिलने पर उसे कासगंज के अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसके पिता और परिवार के अन्य सदस्य अस्पताल में उसकी देखभाल कर रहे हैं। इतनी कम उम्र के बच्चे के लिए चिकित्सकीय निगरानी और सुरक्षित वातावरण बेहद महत्वपूर्ण है।

बच्चे की बरामदगी इस मामले का राहत देने वाला पहलू है, लेकिन उसके स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा को लेकर सतर्कता जरूरी है। संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार उसकी देखभाल और अभिरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बच्चे की निजता की रक्षा करना भी आवश्यक है।

इस घटना ने परिवार को झकझोर दिया है। जिस बच्चे के गायब होने की शिकायत की गई थी, उसी मामले में उसकी मां पर उसे कथित तौर पर बेचने का आरोप लगा है। आरोपों की गंभीरता के बावजूद जांच पूरी होने और अदालत के निर्णय से पहले किसी को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा।

सीओ आंचल चौहान ने की गिरफ्तारी और बरामदगी की पुष्टि

क्षेत्राधिकारी आंचल चौहान के मुताबिक, पुलिस ने नवजात को बरामद कर लिया है। उन्होंने बताया कि मामले में बच्चे की मां और झोलाछाप दंपती को गिरफ्तार किया गया है। बच्चे को कथित तौर पर खरीदने वाले महीपाल और संतोषी की तलाश की जा रही है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की आगे जांच कर रही है।

जांच में बैंक खाते का लेनदेन, संबंधित लोगों के बयान और बच्चे की बरामदगी महत्वपूर्ण बिंदु हैं। पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि कथित सौदे की योजना कैसे बनी, रुपये का भुगतान किस प्रकार किया गया और इसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति की क्या भूमिका रही। आगे की कार्रवाई जांच में मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

बाल सुरक्षा पर गंभीर सवाल, गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी

कासगंज नवजात बच्चा बेचने का मामला बच्चों की सुरक्षा और कानूनी गोद लेने की प्रक्रिया की अहमियत को सामने लाता है। नवजात अपनी देखभाल, भोजन, उपचार और सुरक्षा के लिए पूरी तरह वयस्कों पर निर्भर होते हैं। ऐसे में बच्चे को कथित रूप से रुपये लेकर किसी अन्य परिवार को सौंपने का आरोप बेहद गंभीर है। किसी बच्चे को गोद लेने की इच्छा रखने वाले लोगों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। आर्थिक लेनदेन के जरिए बच्चा हासिल करना वैध दत्तक ग्रहण का विकल्प नहीं है।

ऐसे मामलों में पुलिस के साथ बाल कल्याण से जुड़ी संस्थाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। बच्चे की चिकित्सकीय देखभाल, सुरक्षित अभिरक्षा और भविष्य से संबंधित निर्णय सक्षम अधिकारियों को नियमानुसार लेने चाहिए। साथ ही, बच्चे की पहचान और निजता की रक्षा करना भी जरूरी है, ताकि वह भविष्य में अनावश्यक सामाजिक दबाव का सामना न करे।

इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि नवजात के लापता होने जैसे संवेदनशील मामलों में शिकायत, बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। बैंक लेनदेन जैसे तथ्य जांच की दिशा बदल सकते हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति की भूमिका का अंतिम निर्धारण सभी साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही किया जाना चाहिए।

अब फरार दंपती की तलाश, जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करने और फरार दंपती का पता लगाने की है। कासगंज नवजात बच्चा बेचने का मामला कई सवाल छोड़ गया है। कथित सौदे में कौन-कौन शामिल था, रकम का लेनदेन किस परिस्थिति में हुआ और बच्चे को दूसरे परिवार तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया क्या थी, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

45 दिन के नवजात की बरामदगी से परिवार को राहत जरूर मिली है, लेकिन यह मामला बाल सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता भी बताता है। पुलिस की आगे की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया से ही इस घटनाक्रम की पूरी सच्चाई सामने आएगी।

जनगणदूत.कॉम की संपादकीय टिप्पणी:

यह समाचार उपलब्ध जानकारी और पुलिस के हवाले से सामने आए आरोपों पर आधारित है। आरोपों को न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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