रायपुर, छत्तीसगढ़। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रत्युषा फाउंडेशन, रायपुर की ओर से मूक-बधिर विद्यालय कोपलवाणी, सिमरिया में ‘दिव्यरूपेण गरबा’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन लगातार चौथे वर्ष किया गया, जिसमें दिव्यांग बच्चों ने गरबा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और अन्य गतिविधियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा, उत्साह और आत्मविश्वास का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में कन्या पूजन, कन्या भोज और बच्चों को उपहार भेंट करने के साथ सामाजिक समरसता तथा समानता का संदेश भी दिया गया।
संस्था की संस्थापिका प्रीति दास मिश्रा ने बताया कि प्रत्युषा फाउंडेशन प्रत्येक वर्ष शारदीय नवरात्रि के दौरान दिव्यांग बच्चों के लिए इस विशेष आयोजन का संचालन करती है। कार्यक्रम से पहले बच्चों को तीन दिनों तक गरबा का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद विद्यालय की नौ कन्याओं का पूजन किया जाता है, जबकि दो बच्चों को लंगूर के रूप में पूजने की परंपरा निभाई जाती है। पूजन के पश्चात सभी छात्र-छात्राओं को उपहार स्वरूप डांडिया भेंट किए जाते हैं और उनके लिए भोजन की व्यवस्था की जाती है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना, उनकी प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना तथा उनमें आत्मविश्वास, समानता और सम्मान की भावना को मजबूत बनाना है। संस्था का प्रयास है कि दिव्यांग बच्चे भी सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में समान भागीदारी के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।
तिलक लगाकर अतिथियों का स्वागत, दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत संस्था की संस्थापिका, सदस्यों और दिव्यांग बच्चों द्वारा अतिथियों का तिलक लगाकर स्वागत करने से हुई। इसके बाद अतिथियों ने दीप प्रज्वलित किया और कन्या पूजन किया। दिव्यांग बच्चों ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग स्मृति-चिह्न के रूप में अतिथियों को भेंट की गई। साथ ही उन्हें शॉल और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।
दिव्यांग बच्चों के साथ अतिथियों ने भी खेला गरबा
आयोजन का सबसे आकर्षक पक्ष वह रहा, जब अतिथियों, विद्यालय की शिक्षिकाओं, संस्था के सदस्यों और दिव्यांग बच्चों ने एक साथ गरबा खेला। सांस्कृतिक गतिविधियों के दौरान बच्चों ने अपनी प्रतिभा और उत्साह का सुंदर प्रदर्शन किया। पूरा वातावरण भक्ति, उल्लास, आत्मीयता और आपसी सहयोग की भावना से सराबोर रहा। इस सहभागिता ने यह संदेश दिया कि अवसर, प्रोत्साहन और सम्मान मिलने पर दिव्यांग बच्चे भी अपनी क्षमताओं को प्रभावशाली ढंग से सामने ला सकते हैं।
गणमान्य अतिथियों ने की पहल की सराहना
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के अल्पसंख्यक आयोग से अमरजीत सिंह छाबड़ा, प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की डॉ. नीतू सिंह, विजय मनवानी और पदमा शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों ने प्रत्युषा फाउंडेशन की इस पहल की सराहना की और बच्चों के साथ समय बिताकर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने बच्चों को आगे बढ़ने, अपनी प्रतिभा पर विश्वास रखने और जीवन में नए अवसरों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
टीम के सहयोग से सफल हुआ आयोजन
प्रत्युषा फाउंडेशन की अध्यक्ष सुमन पांडे और संस्थापिका प्रीति दास मिश्रा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सांस्कृतिक उपाध्यक्ष अर्चना वोरा, उपाध्यक्ष विद्या भट्ट, सचिव लक्ष्मी जिल्हारे, सचिव रितु प्रजापति, सोनिया सिंह और कमल प्रजापति का विशेष सहयोग रहा।
सांकेतिक भाषा सीखने का भी दिया संदेश
प्रत्युषा फाउंडेशन का मानना है कि दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केवल उनके लिए कार्यक्रम आयोजित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज के लोगों को भी उनकी जरूरतों और संवाद के तरीकों को समझना चाहिए। संस्था ने इस बात पर जोर दिया कि समाजसेवियों और सामान्य नागरिकों को भी सांकेतिक भाषा सीखने का प्रयास करना चाहिए, ताकि मूक-बधिर बच्चों के साथ संवाद स्थापित करने में आसानी हो और वे स्वयं को समाज का अभिन्न हिस्सा महसूस कर सकें।
‘दिव्यरूपेण गरबा’ का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक संवेदनशीलता, समावेशिता और मानवीय समानता का संदेश देने वाला रहा। प्रत्युषा फाउंडेशन की यह पहल बताती है कि सच्चे अर्थों में उत्सव वही है, जिसमें समाज के हर वर्ग को सम्मान, सहभागिता और खुशियां बांटने का अवसर मिले।












