11 महीने बाद खुला पति की हत्या का राज, पत्नी और कथित प्रेमी गिरफ्तार; शव के तीन टुकड़े कर जंगल में फेंकने का आरोप
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में सामने आए एक सनसनीखेज हत्याकांड ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। करीब 11 महीने तक लापता रहे एक व्यक्ति की गुमशुदगी का मामला अब एक जघन्य हत्या में तब्दील हो गया है। पुलिस जांच में आरोप है कि मृतक की पत्नी ने अपने कथित प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या कर दी और पहचान छिपाने के उद्देश्य से शव के तीन टुकड़े कर जंगल में अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिए। पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और लोग दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
गुमशुदगी की कहानी से हत्या की साजिश तक
यह मामला देवरिया जिले के बनकटा थाना क्षेत्र के कोठिलवां गांव का है। मृतक की पहचान 50 वर्षीय बलिराम सूर्यनाथ कुशवाहा के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, बलिराम पिछले वर्ष अगस्त 2025 से लापता थे। शुरुआत में परिवार और गांव के लोगों को यही बताया जाता रहा कि वह घर छोड़कर कहीं चले गए हैं या किसी आश्रम में रहने लगे हैं।
करीब 11 महीने तक यही कहानी दोहराई जाती रही। हालांकि समय बीतने के बावजूद जब बलिराम का कोई सुराग नहीं मिला तो उनके भाई को संदेह हुआ। इसके बाद अप्रैल 2026 में पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसी रिपोर्ट के आधार पर शुरू हुई जांच ने एक ऐसे हत्याकांड का पर्दाफाश किया जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया।
पुलिस जांच में सामने आई चौंकाने वाली कहानी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान मृतक की पत्नी सुनीता कुशवाहा और उसके कथित प्रेमी राहुल दशरथ प्रजापति की गतिविधियां संदेह के घेरे में आईं। पुलिस ने दोनों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल, लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया।
पूछताछ के दौरान दोनों के बयान बार-बार बदलते रहे। जब पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सख्ती से पूछताछ की तो दोनों के बयान में विरोधाभास सामने आया। इसके बाद पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपियों ने हत्या की साजिश और वारदात में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली।
वारदात से पहले बच्चों को भेजा गया रिश्तेदार के घर
जांच के अनुसार, हत्या की पूरी योजना पहले से तैयार की गई थी। पुलिस का कहना है कि वारदात वाली रात दंपति के दोनों बच्चों को उनकी मौसी के घर भेज दिया गया, ताकि घर में कोई प्रत्यक्ष गवाह न रहे।
इसके बाद कथित रूप से पत्नी और उसके प्रेमी ने मिलकर बलिराम की गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्या के बाद पहचान मिटाने और पुलिस को गुमराह करने के उद्देश्य से शव के तीन हिस्से किए गए। पुलिस के अनुसार, शव के टुकड़ों को अलग-अलग बोरियों और चादरों में पैक कर ऑटो रिक्शा से गावली देव पहाड़ी के जंगल में ले जाकर अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया गया।
हत्या के बाद रची गई गुमराह करने की कहानी
पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद सुनीता अपने बच्चों को लेकर दूसरे स्थान पर रहने लगी। गांव और रिश्तेदारों के बीच वह लगातार यह कहती रही कि उसका पति घर छोड़कर चला गया है। कभी वह आश्रम जाने की बात कहती तो कभी किसी अन्य स्थान पर रहने की जानकारी देती थी।
इसी वजह से लंबे समय तक किसी को हत्या का संदेह नहीं हुआ। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया और बलिराम का कोई पता नहीं चला, परिवार के लोगों को शक होने लगा। आखिरकार गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस की जांच ने पूरे मामले की परतें खोल दीं।
ग्रामीणों में भारी आक्रोश, न्याय की उठी मांग
मामले के खुलासे के बाद कोठिलवां गांव में शोक और गुस्से का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुलिस जांच में लगाए गए आरोप न्यायालय में सिद्ध होते हैं तो दोषियों को कानून के अनुसार कठोरतम दंड मिलना चाहिए।
मृतक के रिश्ते की चाची सरस्वती देवी ने कहा कि परिवार लंबे समय तक इस उम्मीद में था कि बलिराम किसी दिन वापस लौट आएंगे, लेकिन अब सामने आई सच्चाई बेहद दर्दनाक है। उन्होंने कहा कि पूरे परिवार को न्याय मिलना चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
आरोपी की मां ने भी जताई नाराजगी
घटना ने दोनों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। आरोपी पत्नी की मां कलावती देवी ने भी अपनी बेटी के कथित कृत्य की निंदा की। उन्होंने कहा कि परिवार के लोग जब भी दामाद के बारे में पूछते थे तो बेटी अलग-अलग बहाने बनाती थी। कभी कहती थी कि वह कहीं चले गए हैं तो कभी आश्रम में रहने की बात करती थी। उन्हें भी इस घटना की वास्तविकता का अंदाजा नहीं था।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो कानून को अपना काम पूरी सख्ती के साथ करना चाहिए।
18 वर्ष पहले हुई थी शादी
जानकारी के अनुसार, बलिराम और सुनीता का विवाह लगभग 18 वर्ष पहले हुआ था। दोनों के बच्चे भी हैं। सुनीता का मायका भाटपाररानी थाना क्षेत्र के खड़ेशर गांव में है। उसके पिता का पहले ही निधन हो चुका है। घटना के बाद दोनों परिवारों में शोक और तनाव का माहौल बना हुआ है।
पुलिस की जांच अभी जारी
पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही जंगल में शव के अन्य संभावित अवशेषों और मामले से जुड़े अतिरिक्त साक्ष्यों की तलाश भी जारी है। पुलिस का कहना है कि विवेचना के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हें केस डायरी में शामिल किया जाएगा और उसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि गंभीर अपराधों में तकनीकी जांच, कॉल डिटेल और डिजिटल साक्ष्य किस तरह महीनों पुराने मामलों की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अब पूरे मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर किया जाएगा।







