यूपी पंचायत चुनाव : ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने पर हाई कोर्ट की रोक, सरकार करेगी अपील की तैयारी
कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक नियुक्ति पर उठा संवैधानिक विवाद, 13 जुलाई तक चुनाव की रूपरेखा पेश करने का हाई कोर्ट का निर्देश
कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों के भविष्य और पंचायत चुनाव को लेकर संवैधानिक बहस तेज हो गई है। प्रदेश के सभी ग्राम प्रधानों का पांच वर्षीय कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त होने के बाद राज्य सरकार ने उन्हें अधिकतम छह माह के लिए प्रशासक के रूप में कार्य करने की अनुमति दी थी। हालांकि, इस फैसले को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने असंवैधानिक बताते हुए स्पष्ट कर दिया कि जिन ग्राम प्रधानों का संवैधानिक कार्यकाल समाप्त हो चुका है, वे प्रशासक की भूमिका नहीं निभा सकते। अब राज्य सरकार इस आदेश के खिलाफ उच्च अदालत में अपील करने की तैयारी में जुट गई है।
हाई कोर्ट ने सरकार से मांगी पंचायत चुनाव की रूपरेखा
इलाहाबाद हाई कोर्ट की एकल पीठ के न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने अपने 25 जून के आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह 13 जुलाई तक उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव कराने की विस्तृत रूपरेखा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि संविधान के अनुरूप पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता और कार्यकाल समाप्त होने के बाद उसी पंचायत के निर्वाचित प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करना संविधान की भावना के विपरीत है।
अदालत ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 243(ई) और अनुच्छेद 243(के) का उल्लेख करते हुए कहा कि पंचायतों का समय पर चुनाव कराना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल आवश्यकता है। किसी भी परिस्थिति में निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल अनिश्चितकाल तक नहीं बढ़ाया जा सकता।
सरकार अपील की तैयारी में, अगले सप्ताह उठाया जा सकता है कदम
शासन स्तर के सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल करने की तैयारी कर रही है। सरकार का मानना है कि उत्तर प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम, 1947 की धारा 12 की उपधारा (3-ए) अभी भी प्रभावी है और विशेष परिस्थितियों में वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था लागू करने का कानूनी आधार प्रदान करती है।
इसी कानूनी प्रावधान के आधार पर सरकार अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखने की रणनीति तैयार कर रही है। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह इस संबंध में औपचारिक अपील दायर की जा सकती है।
क्या कहती है पंचायतीराज अधिनियम की धारा 12 (3-ए)?
उत्तर प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम, 1947 की धारा 12 की उपधारा (3-ए) का उद्देश्य उन असाधारण परिस्थितियों से निपटना है, जब निर्धारित समय पर पंचायत चुनाव कराना संभव न हो सके। इस प्रावधान के तहत सरकार ग्राम पंचायत के नियमित चुनाव होने तक वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था लागू कर सकती है।
इसमें प्रशासक अथवा प्रशासनिक समिति की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है ताकि पंचायतों के दैनिक प्रशासनिक कार्य बाधित न हों। यह संशोधन अप्रैल 1994 में लागू किया गया था और वर्तमान में भी अधिनियम का हिस्सा बना हुआ है।
प्रेम लाल पटेल मामले का हवाला बना चुनौती का आधार
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ‘प्रेम लाल पटेल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि धारा 12 (3-ए) का इस्तेमाल चुनावों को अनिश्चितकाल तक टालने या निर्वाचित प्रतिनिधियों अथवा प्रशासकों का कार्यकाल मनमाने ढंग से बढ़ाने के लिए नहीं किया जा सकता।
अदालत ने अपने पूर्व निर्णय में यह भी कहा था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में नियमित चुनाव संवैधानिक अनिवार्यता हैं और प्रशासनिक व्यवस्था के नाम पर निर्वाचित निकायों का स्थान लंबे समय तक नहीं लिया जा सकता।
26 मई को समाप्त हुआ था ग्राम प्रधानों का कार्यकाल
उत्तर प्रदेश के सभी ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने आदेश जारी कर पूर्व ग्राम प्रधानों को अधिकतम छह महीने के लिए प्रशासक के रूप में कार्य करने की अनुमति दी थी। यह अवधि 27 मई 2026 से प्रभावी मानी गई।
सरकार के आदेश के अनुसार प्रशासक केवल नियमित प्रशासनिक कार्यों का संचालन कर सकते हैं। किसी भी नई योजना, वित्तीय निर्णय या नीतिगत प्रस्ताव को लागू करने के लिए संबंधित जिलाधिकारी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी।
अब पंचायत चुनाव की तारीखों पर टिकी निगाहें
हाई कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद अब पूरे प्रदेश की नजर पंचायत चुनाव की घोषणा पर टिकी हुई है। यदि सरकार अपील करती है तो मामला उच्च न्यायिक स्तर पर जाएगा, जबकि दूसरी ओर चुनाव आयोग और राज्य सरकार को समयबद्ध चुनाव कराने की दिशा में भी कदम उठाने होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल ग्राम प्रधानों की नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय स्वशासन, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संविधान की मूल भावना से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में अदालत का अंतिम निर्णय भविष्य में पंचायत चुनावों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
मुख्य बिंदु
- ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हुआ।
- सरकार ने पूर्व प्रधानों को अधिकतम छह माह के लिए प्रशासक नियुक्त किया।
- इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस व्यवस्था पर रोक लगाते हुए इसे असंवैधानिक बताया।
- 13 जुलाई तक पंचायत चुनाव की रूपरेखा पेश करने का निर्देश।
- राज्य सरकार हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की तैयारी में।
- धारा 12 (3-ए) को लेकर कानूनी बहस फिर तेज।








