देवरिया

पति की मौत के बाद न्याय के लिए डटी रही पत्नी, आखिरकार गिरफ्तार हुई पूर्व BSA शालिनी श्रीवास्तव; 16 लाख रिश्वत मांगने का आरोप

शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह सुसाइड केस में पुलिस को बड़ी सफलता

देवरिया शिक्षक सुसाइड केस में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या मामले की मुख्य आरोपी और पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) शालिनी श्रीवास्तव को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया है। मृतक शिक्षक की पत्नी ने आरोप लगाया था कि हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन के बदले 16 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। लगातार कथित उत्पीड़न और भ्रष्टाचार से परेशान होकर कृष्ण मोहन सिंह ने आत्महत्या कर ली थी। मामले में पहले ही एक आरोपी को जेल भेजा जा चुका है, जबकि दूसरे आरोपी की तलाश जारी है। यह मामला उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। देवरिया की यह चर्चित घटना प्रदेशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है और पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए हुए है।

इरफान अली लारी की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में चर्चित शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मामले की मुख्य आरोपी और देवरिया की पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव को पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। शालिनी श्रीवास्तव पिछले कई महीनों से फरार चल रही थीं और उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही थी। पुलिस ने उन पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा था।

इस मामले ने पूरे प्रदेश में शिक्षा विभाग की कार्यशैली, भ्रष्टाचार और सरकारी तंत्र में व्याप्त कथित रिश्वतखोरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक शिक्षक की आत्महत्या और उसकी पत्नी द्वारा न्याय के लिए लड़ी गई लंबी लड़ाई अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है।

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

मूल रूप से कुशीनगर जिले के निवासी कृष्ण मोहन सिंह की नियुक्ति वर्ष 2016 में देवरिया जिले के गौरीबाजार क्षेत्र स्थित एक विद्यालय में शिक्षक के रूप में हुई थी। कई वर्षों तक सेवा देने के बाद वर्ष 2022 में एसटीएफ की जांच के आधार पर उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए गए और उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इसके साथ ही उनका वेतन भी रोक दिया गया।

अपनी बर्खास्तगी को गलत बताते हुए कृष्ण मोहन सिंह ने न्यायालय की शरण ली। मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां शिक्षक को राहत मिली और अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत के आदेश के बाद उम्मीद थी कि शिक्षा विभाग उनकी सेवा और वेतन संबंधी समस्याओं का समाधान करेगा, लेकिन आरोप है कि ऐसा नहीं हुआ।

हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं मिला न्याय

परिजनों का आरोप है कि हाई कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद शिक्षा विभाग ने आदेश का पालन करने में लगातार टालमटोल की। शिक्षक को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े। आरोप यह भी है कि विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने काम कराने के नाम पर रिश्वत की मांग शुरू कर दी।

बताया जाता है कि कृष्ण मोहन सिंह लगातार मानसिक तनाव में रहने लगे थे। नौकरी बहाल कराने और रुका हुआ वेतन पाने के लिए वह कई स्तरों पर प्रयास कर रहे थे, लेकिन उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल रही थी। इस दौरान कथित तौर पर उनसे मोटी रकम की मांग की गई, जिसने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया।

आत्महत्या से पहले वीडियो और सुसाइड नोट ने खोले कई राज

कृष्ण मोहन सिंह ने आत्महत्या करने से पहले एक वीडियो संदेश रिकॉर्ड किया था, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में उन्होंने अपनी परेशानियों का जिक्र करते हुए शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

इतना ही नहीं, उनकी जेब से चार पन्नों का एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था। इस नोट में उन्होंने विस्तार से बताया था कि किस तरह वह लगातार मानसिक दबाव, आर्थिक संकट और कथित उत्पीड़न का सामना कर रहे थे। यही दस्तावेज बाद में पुलिस जांच का महत्वपूर्ण आधार बने।

पत्नी ने लगाया 16 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप

इस पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका शिक्षक की पत्नी गुड़िया सिंह ने निभाई। पति की मौत के बाद उन्होंने हार नहीं मानी और न्याय की लड़ाई जारी रखी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराते हुए गंभीर आरोप लगाए।

गुड़िया सिंह का कहना था कि हाई कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने और विभागीय कार्यवाही पूरी करने के बदले तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव तथा लिपिक संजीव सिंह ने 16 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। आरोपों के अनुसार, परिवार ने रिश्तेदारों से उधार लेकर और गहने गिरवी रखकर यह रकम जुटाई थी।

परिजनों का दावा है कि इतनी बड़ी राशि देने के बाद भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और लगातार नई मांगें सामने आती रहीं। इससे कृष्ण मोहन सिंह मानसिक रूप से टूट गए और अंततः उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया।

पुलिस जांच में तेजी, एक आरोपी पहले ही जा चुका है जेल

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विस्तृत जांच शुरू की। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए। इस प्रकरण में आरोपी बनाए गए रिटायर्ड प्रिंसिपल अनिरुद्ध सिंह को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।

इसके बाद पुलिस की टीमें अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश देती रहीं। फरार चल रही पूर्व बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाया गया। दोनों पर इनाम भी घोषित किया गया था।

दिल्ली से गिरफ्तार हुई पूर्व बीएसए शालिनी श्रीवास्तव

लंबे समय से फरार चल रही शालिनी श्रीवास्तव की तलाश में पुलिस कई राज्यों में सक्रिय थी। तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर उनकी लोकेशन दिल्ली में मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने वहां पहुंचकर कार्रवाई की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद उनसे मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पूछताछ की जाएगी। जांच एजेंसियों का मानना है कि पूछताछ से कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

अभी भी फरार है मुख्य आरोपी बाबू संजीव सिंह

जहां एक ओर पूर्व बीएसए की गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है, वहीं इस मामले का एक अन्य प्रमुख आरोपी लिपिक संजीव सिंह अभी भी फरार है। पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस को उम्मीद है कि शालिनी श्रीवास्तव से पूछताछ के दौरान संजीव सिंह के ठिकानों और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी मिल सकती है।

भ्रष्टाचार और जवाबदेही पर उठे बड़े सवाल

कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण ने शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। यदि जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ एक आत्महत्या का नहीं बल्कि सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की एक बड़ी मिसाल बन सकता है।

इस मामले ने यह भी दिखाया कि एक सामान्य शिक्षक और उसका परिवार किस तरह न्याय के लिए संघर्ष करता रहा। पति की मौत के बाद भी गुड़िया सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार कानूनी लड़ाई लड़ती रहीं। उनकी दृढ़ता और संघर्ष के चलते ही मामले की जांच आगे बढ़ी और अब प्रमुख आरोपी कानून के शिकंजे में पहुंचने लगे हैं।

देवरिया का शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह सुसाइड केस अब उत्तर प्रदेश के चर्चित मामलों में शामिल हो चुका है। पूर्व बीएसए शालिनी श्रीवास्तव की गिरफ्तारी से जांच को नई दिशा मिली है, जबकि फरार आरोपी संजीव सिंह की तलाश जारी है। पूरे प्रदेश की नजर अब इस बात पर टिकी है कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया में आगे क्या निष्कर्ष निकलता है और क्या पीड़ित परिवार को पूर्ण न्याय मिल पाता है या नहीं।

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