संवाद, सहमति और समाधान का महाकुंभ : बाराबंकी की राष्ट्रीय लोक अदालत में 1.56 लाख मामलों का निस्तारण
अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट
बाराबंकी में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने इस बार न्यायिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। संवाद, सहमति और समाधान की भावना के साथ आयोजित इस विशेष अदालत में रिकॉर्ड स्तर पर मामलों का निस्तारण हुआ। जिला न्यायालय परिसर में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में एक लाख छप्पन हजार से अधिक मामलों का समाधान किया गया, जबकि 16 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि अर्थदंड और प्रतिकर के रूप में जमा कराई गई।
यह आयोजन केवल मुकदमों के निपटारे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक समरसता, आपसी समझ और न्याय व्यवस्था को सरल एवं मानवीय बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और आम नागरिकों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को विशेष स्वरूप प्रदान किया।
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर हुआ आयोजन
राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष एवं जनपद न्यायाधीश प्रतिमा श्रीवास्तव ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण की पीठासीन अधिकारी अल्पना सक्सेना, वंदना सिंह प्रथम, अपर जिला जज एवं राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी श्रीकृष्ण चन्द्र सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव उज्ज्वल उपाध्याय सहित कई न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा अधिवक्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और मीडिया प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भागीदारी निभाई। पूरे आयोजन में न्यायिक व्यवस्था को अधिक जनसुलभ बनाने का संदेश स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
‘संवाद और सहमति ही लोक अदालत की आत्मा’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनपद न्यायाधीश प्रतिमा श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत केवल मुकदमों के निस्तारण का मंच नहीं है, बल्कि यह समाज में सौहार्द और आपसी विश्वास को मजबूत करने का माध्यम भी है।
उन्होंने कहा कि संवाद, संवेदनशीलता और सहमति ही लोक अदालत की वास्तविक आत्मा है। यहां लोगों को त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय उपलब्ध कराया जाता है।
उन्होंने न्यायिक अधिकारियों और संबंधित विभागों से अपील की कि वे अधिक से अधिक मामलों का समाधान मानवीय दृष्टिकोण के साथ करें। उन्होंने कहा कि न्याय तभी सार्थक है जब वह लोगों तक सरलता से पहुंचे और विवादों का समाधान शांति एवं सहमति से हो।
प्रतिमा श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि— “विवाद नहीं समाधान हमारा लक्ष्य हो और टकराव नहीं समन्वय हमारा मार्ग हो।” उनके इस संदेश ने पूरे कार्यक्रम को सकारात्मक ऊर्जा और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से भर दिया।
1 लाख 56 हजार 664 मामलों का रिकॉर्ड निस्तारण
राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी श्रीकृष्ण चन्द्र सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में कुल 1 लाख 56 हजार 664 मामलों का निस्तारण किया गया। इन मामलों के समाधान के साथ कुल 16 करोड़ 19 लाख 5 हजार 936 रुपये की धनराशि अर्थदंड और प्रतिकर के रूप में जमा कराई गई।
उन्होंने बताया कि सिविल कोर्ट बाराबंकी के विभिन्न न्यायालयों ने 34 हजार 873 मामलों का निस्तारण करते हुए 5 करोड़ 73 लाख रुपये से अधिक की वसूली की। यह आंकड़ा दर्शाता है कि लोक अदालत लोगों के बीच न्याय के प्रति विश्वास को लगातार मजबूत कर रही है।
प्री-लिटिगेशन मामलों में भी बड़ी सफलता
लोक अदालत के दौरान प्री-लिटिगेशन स्तर पर भी बड़ी संख्या में मामलों का समाधान हुआ। वैवाहिक विवाद, बैंक ऋण, राजस्व और अन्य विभागीय मामलों सहित कुल 1 लाख 21 हजार 791 मामलों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में 10 करोड़ 45 लाख रुपये से अधिक की धनराशि की वसूली हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विवाद अदालत पहुंचने से पहले ही आपसी सहमति से समाप्त हो जाएं तो इससे न्यायालयों पर भार कम होता है और लोगों का समय व धन दोनों बचते हैं।
मोटर दुर्घटना मामलों में मिला त्वरित प्रतिकर
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण न्यायालय ने भी इस लोक अदालत में अहम भूमिका निभाई। यहां 74 मामलों का निस्तारण करते हुए 3 करोड़ 40 लाख रुपये से अधिक की प्रतिकर राशि पीड़ितों को प्रदान की गई।
दुर्घटना पीड़ित परिवारों के लिए यह राहत अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि सामान्य न्यायिक प्रक्रिया में ऐसे मामलों में लंबा समय लग जाता है। लोक अदालत ने इन मामलों में त्वरित न्याय का उदाहरण प्रस्तुत किया।
पारिवारिक न्यायालयों में सुलह का अनूठा दृश्य
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान पारिवारिक न्यायालयों में एक बेहद भावुक और सकारात्मक दृश्य देखने को मिला। यहां 15 जोड़ों को आपसी सहमति के बाद एक साथ विदा किया गया। नवदंपतियों को माला पहनाकर मिठाई खिलाई गई, जबकि उनके बच्चों को चॉकलेट वितरित की गई।
यह दृश्य केवल कानूनी समझौते का नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों को दोबारा जोड़ने की मानवीय पहल का प्रतीक बन गया। पारिवारिक विवादों में समझौते की यह पहल सामाजिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सीजेएम सुधा सिंह ने किए सर्वाधिक मुकदमों का निस्तारण
लोक अदालत में विभिन्न न्यायिक अधिकारियों ने उल्लेखनीय कार्य किया। सीजेएम बाराबंकी सुधा सिंह ने सर्वाधिक 11 हजार 17 मुकदमों का निस्तारण किया। इसके साथ उन्होंने 3 लाख 39 हजार रुपये अर्थदंड के रूप में वसूल किए।
उनकी सक्रियता और कार्यशैली की न्यायिक हलकों में सराहना की जा रही है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि न्यायिक तंत्र समर्पण के साथ कार्य करे तो लंबित मामलों का तेजी से समाधान संभव है।
बैंकों ने भी वसूली में दिखाई सक्रियता
राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही। जिले की विभिन्न बैंकों ने 1192 एनपीए खातों का निस्तारण करते हुए 7 करोड़ 45 लाख रुपये से अधिक की वसूली की। इनमें बैंक ऑफ इंडिया सबसे आगे रहा, जिसने सर्वाधिक 483 मामलों का समाधान किया।
बैंकिंग क्षेत्र के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि एनपीए मामलों का समाधान वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने में मदद करता है।
वादकारियों के लिए विशेष सुविधाओं की व्यवस्था
लोक अदालत में आने वाले वादकारियों और आम लोगों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। जिला न्यायालय परिसर में हेल्प डेस्क स्थापित किए गए, जहां लोगों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, स्वच्छ पेयजल और जलपान की भी व्यवस्था रही।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव उज्ज्वल उपाध्याय ने बताया कि पराविधिक स्वयं सेवकों ने आम लोगों की सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और लोगों को उनके मामलों से संबंधित जानकारी देने में सहयोग किया।
न्याय व्यवस्था को जनसुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम
बाराबंकी की राष्ट्रीय लोक अदालत ने यह साबित कर दिया कि न्याय केवल अदालतों की दीवारों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे आम लोगों तक सहज और सरल रूप में पहुंचना चाहिए।
लोक अदालत की अवधारणा समाज में संवाद, समझौता और सामाजिक समरसता को मजबूत करती है। इससे लोगों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलती है और न्याय व्यवस्था पर विश्वास बढ़ता है।
बाराबंकी में हुआ यह आयोजन न केवल आंकड़ों के लिहाज से ऐतिहासिक रहा, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण और सामाजिक समन्वय का भी उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया।







