लखनऊ

करोड़ों की जमीन घोटाले का आरोप : फर्जी रजिस्ट्री, चेक बाउंस और जान से मारने की धमकी

पीड़ित ने खोली ‘भूमाफिया नेटवर्क’ की परतें

 कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक वंचित जमीन घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें करोड़ों रुपये की जमीन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह मामला बंथरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मेमोरा जनजाति क्षेत्र का है, जहां पीड़ित परिवार ने कथित तौर पर फर्जी रजिस्ट्री, जैसे कि धोखाधड़ी, खतरनाक और आर्थिक समुदाय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पूरे प्रकरण में न केवल प्रशासन बल्कि आम जनता के बीच भी चिंता बढ़ा दी गई है।

पीड़ित अमित कुमार गुप्ता, जो श्यामगंज स्थित नारायण प्रताप मार्ग के निवासी हैं, ने आरोप लगाया है कि मुकेश जिंदल और उनके बेटे ग्रैंड जिंदल ने उन्हें योजनाबद्ध तरीके से करोड़ों रुपये की जमीन के सौदे में फंसाया। पीड़ितों के अनुसार, यह मामला वर्ष 2013 से शुरू हुआ, जब वे मुकेश जिंदल (जो एलडीआरसी अमीट्रिक कंपनी से जुड़े हुए थे) से 18,200 वर्ग फीट जमीन शामिल थी। इस जमीन पर उन्होंने घर और होटल का निर्माण भी किया।

पूरा खेल कैसे हुआ?

पीड़ितों के मुताबिक, साल 2023 में मुकेश जिंदल ने उन्हें एक और जमीन का प्रस्ताव दिया था। यह भूमि गाटा संख्या 109 बताई गई है, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 24,000 वर्ग फुट बताया गया है। डील करीब 90 लाख रुपये में तय हो गई और रजिस्ट्री भी कर दी गई। लेकिन अदर्शन से विवाद शुरू हो गया।

अमित गुप्ता का आरोप है कि जिस जमीन की रजिस्ट्री हुई थी, वह न तो विवाद मुक्त थे और न ही विक्रेता कुमार के व्यवसाय में थे। जब वे कब्जे वाले क्षेत्र में उतरे, तो उन्हें बताया गया कि यह क्षेत्र एयरफोर्स से संबंधित है और वहां किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है। इतना ही नहीं, उन्हें मशीन से भगा दिया गया।

फ़र्ज़वाडे का आरोप और अवैधता

इस घटना के बाद पीड़ित ने कई बार संपर्क किया। शुरुआत में तो रजिस्ट्री ने उन्हें दूसरी जमीन दे दी, लेकिन समय बीतने के बावजूद न तो जमीन बदली गई और न ही रजिस्ट्री को डिजाइन किया गया। पीड़ित का कहना है कि यह एक सुनियोजित धोखाधड़ी है, जिसमें उन्हें फंसाया गया है।

इस पूरे मामले में विविधताएं भी विकल्पों के अनुरूप हैं। एक श्मशान और ज़मीन की रजिस्ट्री कैसे हो गई? किस कागजात की जांच नहीं की गई? यह प्रश्न अब नवीनीकृत लगे हैं।

ख़तरनाक, ग्लास-बैन्ज़ और चेक बाउंस का मामला

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि जब उसने अपने पैसे और जमीन को लेकर विरोध किया तो दादा और उसके बेटों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दे दी। इसके अलावा, निवेशकों द्वारा बताए गए कई चेक भी बाउंस हो गए हैं, जहां कोर्ट में मामला वारंट है।

यह मामला सिर्फ जमीनी विवाद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आपराधिक आपराधिक, वित्तीय अपराध और आर्थिक अपराध की कई परतें सामने आ रही हैं।

पुलिस में शिकायत और जांच शुरू

पीड़ित अमित कुमार गुप्ता ने पूरे मामले की लिखित शिकायत संबंधित अधिकारियों से की। सरोजिनी नगर तहसील क्षेत्र के बंथरा थाने में रुचि के निर्देश दर्ज किये गये हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालाँकि, अभी तक किसी की गर्लफ्रेंड की पुष्टि नहीं हुई है।

भूमाफियाओं का नेटवर्क बढ़ा—एक गंभीर प्रश्न

लखनऊ जैसे बड़े शहर में इस तरह के ज़मीनी घोटाले को लेकर कोई नई बात नहीं है, लेकिन यह मामला कई मायनों में गंभीर है। इसमें एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार जमीन पर हमला, अलास्का भूमि की रजिस्ट्री और फिर पीड़ित को धमाका जैसे आरोप लगे हैं।

यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि शहर में भूमाफियाओं का नेटवर्क अब तक सक्रिय है और किस तरह आम नागरिक अपने जाल में फंसा हुआ है।

कानून क्या है?

भारतीय कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति विशेष फर्जी तरीके से जमीन की चोरी या जमीन की रजिस्ट्री कराता है, तो यह धोखाधड़ी (आईपीसी की धारा 420), आपराधिक साजिश और जालसाजी (धारा 467, 468) के तहत गंभीर अपराध माना जाता है। इसके अलावा, जान से मारने की धमकी देना (धारा 506) भी दंडनीय अपराध है।

पीड़ित को न्याय कब?

अमित कुमार गुप्ता और उनका परिवार पिछले कई वर्षों से इस मामले में न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है। उन्होंने अपने जीवन भर की कमाई इस जमीन में लगा दी, लेकिन अब वे न तो जमीन के मालिक हैं और न ही उनका पैसा वापस मिला है।

उनकी मांग है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, उन्हें उनका पैसा वापस मिले और इस पूरे नेटवर्क को खत्म कर दिया जाए ताकि भविष्य में कोई और इस तरह का रिजर्व का शिकार न बने।

एक बार फिर से यह साबित हो गया है कि रियल एस्टेट सेक्टर में प्लॉट की काफी कमी है। जरूरत है कि सरकार और प्रशासन को इस तरह के मामलों में चयन से लेना चाहिए, रजिस्ट्री प्रक्रिया को और सख्त करना चाहिए और आम जनता को एकजुट करना चाहिए।

जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, तब तक ऐसे दोषियों को सजा नहीं मिलती। अब देखिए यह होगा कि पुलिस की जांच किट प्रभावशाली और प्रभावशाली है, और पीड़ित को न्याय कब तक मिल पाता है।

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क्या यह ज़मीन का सौदा पूरी तरह से सही था?

नहीं, सौदे के अनुसार यह शेयरधारक प्रतिभूति और गलत जानकारी का आधार बनाया गया था।

क्या रजिस्ट्री असली या फ़र्ज़ी थी?

रजिस्ट्रीकरण के बावजूद ज़मीनी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे फ़र्ज़वाडे की ख़तरनाक स्थिति पैदा हो गई है।

क्या वापस पैसे गए?

पीड़ित के अनुसार, अब तक न तो पूरी तरह से नकदी वापस ली गई है और न ही कोई वैकल्पिक जमीन दी गई है।

क्या दिवालियापन ने खतरनाक दी?

हां, विरोध करने पर जान से मारने और हत्या करने के आरोप लगाए गए हैं।

यह मामला न्यायालय में क्या है?

हाँ, चेक बान्स और अन्य मामलों को लेकर कोर्ट में केसर फ़ार्म के बारे में बताया जा रहा है।

पुलिस क्या कर रही है?

पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है और दस्तावेजों की जांच जारी है।

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