देवरिया

श्रद्धा और संस्कारों की विरासत ; डॉ. काशीनाथ मिश्र को भावभीनी श्रद्धांजलि

🖊️ इरफान अली लारी की रिपोर्ट

सलेमपुर (देवरिया)। शिक्षा, संस्कार और संस्कृति के क्षेत्र में अपना अमिट योगदान देने वाले जी एम एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय डॉ. काशीनाथ मिश्र को विद्यालय परिसर में अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण किया गया। यह अवसर केवल एक औपचारिक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उनके आदर्शों, विचारों और जीवन दर्शन को पुनः आत्मसात करने का एक भावनात्मक क्षण बन गया।

विद्यालय के प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। सभी ने एक स्वर में स्वीकार किया कि डॉ. काशीनाथ मिश्र केवल एक शिक्षाविद नहीं थे, बल्कि वे संस्कृत, संस्कृति और संस्कार के सच्चे संवाहक थे, जिनकी सोच और मार्गदर्शन आज भी संस्था की नींव को मजबूत बनाए हुए है।

संस्कृत और संस्कृति के अद्वितीय साधक

विद्यालय की प्रथम एवं मुख्य शाखा के प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि स्वर्गीय डॉ. काशीनाथ मिश्र का व्यक्तित्व बहुआयामी था। वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे, जिनकी विद्वता और सरलता दोनों ही लोगों को प्रभावित करती थीं। उन्होंने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने बताया कि डॉ. मिश्र ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा पी जी कॉलेज आश्रम, बरहज में शिक्षा सेवा को समर्पित किया। वहां रहते हुए उन्होंने अनगिनत विद्यार्थियों को न केवल विषयगत ज्ञान दिया, बल्कि उन्हें जीवन के मूल्यों से भी परिचित कराया। यही कारण है कि उनके छात्र आज विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर रहे हैं और अपने गुरु के आदर्शों को आगे बढ़ा रहे हैं।

जी एम एकेडमी की सफलता के पीछे उनकी प्रेरणा

मोहन द्विवेदी ने आगे कहा कि जी एम एकेडमी की स्थापना और उसके विकास में डॉ. काशीनाथ मिश्र का मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। उनके आशीर्वाद और प्रेरणा से विद्यालय ने निरंतर प्रगति की राह पकड़ी और आज यह क्षेत्र के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में गिना जाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि आज विद्यालय की शाखाएं गोरखपुर और बरहज में भी अपनी पहचान बना रही हैं और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता का नया इतिहास रच रही हैं। यह सब संभव हो पाया है तो केवल उस मजबूत नींव के कारण, जिसे डॉ. मिश्र ने अपने दूरदर्शी विचारों से तैयार किया था।

संस्था के विकास में वर्तमान नेतृत्व की भूमिका

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के चेयरमैन डॉ. श्री प्रकाश मिश्र और निदेशिका डॉ. संभावना मिश्रा के योगदान को भी सराहा गया। वक्ताओं ने कहा कि इनके त्याग, समर्पण और कुशल नेतृत्व के कारण संस्था निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

इन दोनों के मार्गदर्शन में विद्यालय ने न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ाया है, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर भी विशेष ध्यान दिया है। आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना इस संस्था की विशेषता है, जो कहीं न कहीं डॉ. काशीनाथ मिश्र के विचारों से ही प्रेरित है।

श्रद्धांजलि सभा: भावनाओं से भरा वातावरण

कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण वह था जब विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों ने डॉ. काशीनाथ मिश्र के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वातावरण पूरी तरह से भावनात्मक हो गया।

विद्यालय के शिक्षकगण—दिलीप कुमार सिंह, श्वेता राज, साक्षी, जोया, पी. गोस्वामी, धर्मेंद्र मिश्र, राकेश मिश्रा, रेनू सिंह, अल्का दीक्षित, पल्लवी, कृष्णा, आशुतोष, कुडूस, पुरंजय, आदित्य, अमुल्य—तथा अन्य कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने एक-एक कर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा स्रोत

कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों के लिए यह अवसर केवल एक श्रद्धांजलि सभा नहीं था, बल्कि एक प्रेरणादायक अनुभव भी था। उन्हें बताया गया कि किस प्रकार एक व्यक्ति अपने ज्ञान, विचार और कर्म से समाज में स्थायी परिवर्तन ला सकता है।

छात्रों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वे डॉ. काशीनाथ मिश्र के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने यह संकल्प लिया कि वे न केवल पढ़ाई में उत्कृष्टता प्राप्त करेंगे, बल्कि एक अच्छे नागरिक के रूप में समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी निभाएंगे।

संस्कारों की शिक्षा: डॉ. मिश्र की सबसे बड़ी विरासत

डॉ. काशीनाथ मिश्र का मानना था कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें संस्कारों और नैतिक मूल्यों का समावेश भी आवश्यक है। यही कारण है कि उन्होंने हमेशा विद्यार्थियों को सत्य, ईमानदारी, अनुशासन और सेवा जैसे मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

आज जब शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, ऐसे समय में उनके विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्ची शिक्षा वही है, जो व्यक्ति को बेहतर इंसान बनाए।

निष्कर्ष: एक युगदृष्टा को नमन

स्वर्गीय डॉ. काशीनाथ मिश्र का जीवन और कार्य हमें यह सिखाता है कि सच्चे अर्थों में महान वही है, जो अपने ज्ञान और कर्म से समाज को दिशा दे। उन्होंने जिस समर्पण और निष्ठा के साथ शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दिया, वह सदैव स्मरणीय रहेगा।

सलेमपुर के इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि महान व्यक्तित्व भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच न रहें, लेकिन उनके विचार और आदर्श सदैव जीवित रहते हैं।

विद्यालय परिवार ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यही संकल्प लिया कि वे उनके दिखाए मार्ग पर चलकर शिक्षा, संस्कृति और संस्कारों की इस परंपरा को आगे बढ़ाते रहेंगे। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


❓ FAQs (क्लिक करें)

कार्यक्रम कहाँ आयोजित किया गया?

सलेमपुर (देवरिया) में जी एम एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में।

किसे श्रद्धांजलि दी गई?

स्वर्गीय डॉ. काशीनाथ मिश्र को।

डॉ. काशीनाथ मिश्र किस क्षेत्र से जुड़े थे?

वे शिक्षा, संस्कृत, संस्कृति और संस्कार के क्षेत्र से जुड़े थे।

कार्यक्रम में किन लोगों ने भाग लिया?

शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।

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