20 अक्टूबर 2026 4:15 पूर्वाह्न

बिजली संकट पर अखिलेश का हमला, बोले- जनता की परेशानी से बेखबर है भाजपा सरकार

अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ बिजली संकट और भाजपा सरकार पर हमले को दर्शाती फीचर इमेज, जिसमें रिपोर्टर ठाकुर बख्श सिंह की फोटो भी शामिल है।

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ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और लगातार बढ़ रही बिजली कटौती को लेकर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में बिजली संकट अब “महाविद्युत आपदा” का रूप ले चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की परेशानियों को दूर करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है और भाजपा के विधायक व सांसद केवल दिखावटी चिट्ठियां लिखकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रहे हैं।

सपा प्रमुख ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि प्रदेश में बिजली संकट को लेकर जनता में भारी आक्रोश है। इसी नाराजगी से बचने के लिए भाजपा के जनप्रतिनिधि कागजी कवच तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं की ओर से लिखी जा रही चिट्ठियां वास्तव में जनहित का प्रयास नहीं, बल्कि आगामी चुनावों के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करने की कवायद हैं।

भाजपा नेताओं की चिट्ठियां केवल राजनीतिक बचाव : अखिलेश

अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश के कई भाजपा विधायक और सांसद अपनी ही सरकार के खिलाफ पत्र लिखते दिखाई दे रहे हैं। लेकिन यह जनता के हित में उठाया गया कदम नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह चिट्ठियां दरअसल भाजपा के “डूबते जहाज” से निकलने की तैयारी का हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों में विपक्षी दलों से टिकट पाने की उम्मीद में कुछ नेता अपनी छवि बचाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि समाजवादी गठबंधन में ऐसे नेताओं के लिए कोई जगह नहीं होगी, जिन्होंने सत्ता में रहते हुए जनता को केवल परेशानी और संकट दिया है। सपा अध्यक्ष ने कहा कि जनता अब सब समझ चुकी है और केवल बयानबाजी या पत्राचार से उसकी नाराजगी शांत नहीं होने वाली।

भीषण गर्मी और कटौती से आमजन परेशान

प्रदेश में इन दिनों पड़ रही प्रचंड गर्मी के बीच बिजली संकट लोगों की मुश्किलें और बढ़ा रहा है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक लंबे समय तक बिजली कटौती की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे माहौल में अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, बच्चों, बीमारों और महिलाओं को झेलनी पड़ रही है।

उन्होंने कहा कि घरों में पानी की व्यवस्था से लेकर भोजन बनाने तक हर काम बिजली पर निर्भर हो गया है। ऐसे में घंटों बिजली गुल रहने से परिवारों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सपा प्रमुख ने कहा कि जनता गर्मी से झुलस रही है और सरकार केवल दावे करने में लगी हुई है।

उन्होंने कहा कि जो अधिकारी व्यवस्था संभालने के लिए नियुक्त किए गए थे, वही अब समस्या का कारण बनते जा रहे हैं। प्रशासनिक तंत्र जनता की समस्याओं को हल करने के बजाय उन्हें और बढ़ाने का काम कर रहा है।

अफसरशाही और मंत्रियों पर भी साधा निशाना

अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए प्रदेश सरकार के कुछ मंत्रियों और अधिकारियों पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब जनता समस्या का समाधान पूछती है तो जिम्मेदार लोग केवल नारेबाजी करके बच निकलते हैं। इससे साफ है कि सरकार के पास बिजली संकट से निपटने की कोई ठोस योजना नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह नाकाम मंत्रियों को तत्काल हटाए और नई जिम्मेदारियां तय करे। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि इससे मुख्यमंत्री को मंत्रिमंडल विस्तार का अवसर भी मिल जाएगा और कुछ नेताओं को समायोजित करने का मौका भी प्राप्त होगा।

सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सरकार में जवाबदेही समाप्त हो चुकी है। मंत्री और अधिकारी दोनों ही जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनहीन दिखाई दे रहे हैं।

“सरकार को वापसी की उम्मीद नहीं” : सपा प्रमुख

अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश की सत्ता में बैठी सरकार भी समझ चुकी है कि अब उसकी वापसी संभव नहीं है। इसी वजह से जनता की समस्याओं और मांगों की अनदेखी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार का पूरा ध्यान केवल अपने राजनीतिक और आर्थिक हित साधने पर केंद्रित है। जनता की तकलीफों से सरकार को कोई लेना-देना नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता बिजली, पानी, महंगाई और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन सरकार इन मुद्दों पर गंभीर दिखाई नहीं देती। सपा अध्यक्ष ने अपने बयान के अंत में भाजपा पर हमला बोलते हुए लिखा कि अब “जन-जन कहे आज का, भार बन गई भाजपा।”

प्रदेश में बढ़ती बिजली मांग बनी चुनौती

उत्तर प्रदेश में इस समय तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। कई जिलों में ट्रांसफार्मर फुंकने, लो वोल्टेज और अघोषित कटौती की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और अधिक गंभीर बताई जा रही है, जहां कई-कई घंटे बिजली आपूर्ति बाधित रहने से पेयजल संकट भी गहरा रहा है। किसानों को सिंचाई में परेशानी हो रही है जबकि छोटे कारोबारी भी प्रभावित हो रहे हैं।

राजनीतिक दल अब इस मुद्दे को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है जबकि सरकार बिजली आपूर्ति के रिकॉर्ड और आंकड़े पेश कर अपनी उपलब्धियां गिना रही है।

चुनावी मुद्दा बन सकता है बिजली संकट

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बिजली संकट जल्द नियंत्रित नहीं हुआ तो यह आने वाले चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है। गर्मी के मौसम में बिजली कटौती सीधे आमजन के जीवन को प्रभावित करती है, इसलिए जनता की नाराजगी भी तेजी से बढ़ती है।

सपा सहित अन्य विपक्षी दल लगातार इस मुद्दे को उठाकर भाजपा सरकार को घेरने में लगे हैं। वहीं भाजपा सरकार प्रशासनिक स्तर पर सुधार के दावे कर रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक गर्मी ला सकता है।

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