गैस एजेंसी पर प्रशासन का शिकंजा : स्टॉक में भारी गड़बड़ी, सिलेंडर डायवर्जन के आरोप में कार्रवाई तेज
चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एलपीजी गैस वितरण व्यवस्था को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर की गई जांच में एक भारत गैस एजेंसी पर गंभीर अनियमितताओं का मामला उजागर हुआ है। जांच टीम को एजेंसी के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर मिला है। इतना ही नहीं, कुछ घरेलू गैस सिलेंडरों के कथित डायवर्जन के भी संकेत मिले हैं, जिसके बाद प्रशासन ने एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मामला सामने आने के बाद जिले में गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन अब पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए निगरानी बढ़ा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शिकायतों के बाद हरकत में आया प्रशासन
जानकारी के अनुसार आवास विकास कॉलोनी स्थित भारत गैस एजेंसी के खिलाफ पिछले कुछ समय से उपभोक्ताओं की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। कई उपभोक्ताओं ने समय पर सिलेंडर न मिलने, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और वितरण प्रणाली में अनियमितताओं की शिकायत प्रशासन तक पहुंचाई थी।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दिए। इसके बाद संबंधित अधिकारियों की टीम गठित कर एजेंसी का निरीक्षण कराया गया। जांच के दौरान एजेंसी के दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर और वितरण संबंधी अभिलेखों की बारीकी से जांच की गई।
रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में मिला बड़ा अंतर
जांच टीम जब एजेंसी परिसर पहुंची तो वहां मौजूद एलपीजी सिलेंडरों का भौतिक सत्यापन कराया गया। इस दौरान अधिकारियों ने पाया कि रिकॉर्ड में दर्ज सिलेंडरों की संख्या और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर है।
सूत्रों के मुताबिक कई सिलेंडर ऐसे पाए गए जिनका रिकॉर्ड में स्पष्ट उल्लेख नहीं था। इससे यह आशंका मजबूत हुई कि घरेलू उपयोग के सिलेंडरों का कहीं और उपयोग या डायवर्जन किया गया हो सकता है। प्रशासन अब इस पहलू की भी अलग से जांच कर रहा है कि आखिर सिलेंडर कहां भेजे गए और किस उद्देश्य से उनका इस्तेमाल हुआ।
उपभोक्ता सर्वे में भी सामने आईं शिकायतें
जांच केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रही। टीम ने मौके पर उपभोक्ताओं से बातचीत कर वितरण व्यवस्था की भी पड़ताल की। इस दौरान कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की कि गैस सिलेंडर की डिलीवरी में देरी होती है और कई बार एजेंसी की ओर से संतोषजनक जवाब भी नहीं दिया जाता।
कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि बुकिंग के बावजूद समय पर गैस उपलब्ध नहीं कराई जाती। इन शिकायतों के आधार पर प्रशासन ने एजेंसी की कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में माना है।
मार्केट डिसिप्लिन गाइडलाइंस के उल्लंघन का मामला
जांच रिपोर्ट में सामने आई गड़बड़ियों को मार्केट डिसिप्लिन गाइडलाइंस (MDG) के तहत गंभीर श्रेणी की अनियमितता माना गया है। अधिकारियों के अनुसार एलपीजी वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं।
यदि कोई एजेंसी रिकॉर्ड में हेरफेर करती है, स्टॉक छिपाती है या घरेलू सिलेंडरों का व्यावसायिक इस्तेमाल करती है तो यह नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाता है। ऐसे मामलों में आर्थिक दंड से लेकर लाइसेंस संबंधी कार्रवाई तक की जा सकती है।
एजेंसी पर 3 लाख रुपये जुर्माने की तैयारी
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित गैस एजेंसी पर लगभग 3 लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। अधिकारियों ने माना कि स्टॉक मिसमैच और सिलेंडर डायवर्जन जैसी गड़बड़ियां बेहद गंभीर हैं।
इसके साथ ही एजेंसी संचालक को सख्त चेतावनी भी जारी की जा रही है कि भविष्य में यदि ऐसी अनियमितता दोबारा सामने आई तो और कठोर कार्रवाई की जाएगी। संभावना जताई जा रही है कि आगे चलकर एजेंसी की गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी।
एलपीजी व्यवस्था पर उठे कई सवाल
गोंडा में सामने आए इस मामले ने जिले की एलपीजी वितरण व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आम तौर पर घरेलू गैस सिलेंडर आम नागरिकों की जरूरतों से जुड़ा विषय है। ऐसे में यदि वितरण प्रणाली में गड़बड़ी होती है तो इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार घरेलू सिलेंडरों का व्यावसायिक इस्तेमाल करने के लिए डायवर्जन किया जाता है, जिससे आम उपभोक्ताओं को समय पर गैस नहीं मिल पाती। यही वजह है कि प्रशासन ऐसे मामलों में सख्ती दिखा रहा है।
प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी
जिला प्रशासन ने साफ किया है कि उपभोक्ताओं के हितों से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि जिले में संचालित अन्य गैस एजेंसियों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शी और व्यवस्थित गैस वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। यदि भविष्य में किसी एजेंसी के खिलाफ इसी प्रकार की शिकायत मिलती है तो तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
लगातार निगरानी में रहेगा मामला
फिलहाल पूरे मामले की निगरानी जिला प्रशासन स्तर पर की जा रही है। जांच टीम द्वारा तैयार रिपोर्ट जिला पूर्ति विभाग को भेज दी गई है। माना जा रहा है कि आगामी दिनों में विभागीय स्तर पर और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
गोंडा में हुई इस कार्रवाई के बाद अन्य गैस एजेंसियों में भी हलचल बढ़ गई है। प्रशासनिक सख्ती के कारण अब एजेंसियों पर नियमों का पालन करने का दबाव साफ दिखाई दे रहा है। वहीं उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि इस कार्रवाई के बाद गैस वितरण व्यवस्था में सुधार देखने को मिलेगा।








