टेस्ट ऑफ यूपी : आखिर क्यों पूरी दुनिया में मशहूर हैं जौनपुर की इमरती, ‘एटमबम’ मिठाई और जौनपुरी मूली?
स्वाद, परंपरा और पहचान की वह कहानी, जिसने जौनपुर को बना दिया खानपान की अलग दुनिया
राम कीर्ति यादव की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश का जौनपुर जिला सिर्फ अपनी ऐतिहासिक इमारतों, शर्की सल्तनत और सांस्कृतिक विरासत के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यहां का स्वाद भी लोगों के दिलों में खास जगह रखता है। जौनपुर की इमरती, ‘एटमबम’ मिठाई और विशाल आकार वाली जौनपुरी मूली अब केवल स्थानीय खानपान का हिस्सा नहीं रह गई हैं, बल्कि ये जिले की पहचान बन चुकी हैं। यही वजह है कि योगी सरकार की ‘एक जनपद एक व्यंजन’ योजना में जौनपुर के इन पारंपरिक स्वादों को विशेष स्थान मिला है।
जौनपुर का स्वाद केवल मिठास या तीखापन नहीं, बल्कि इतिहास, परंपरा, खेती और स्थानीय हुनर की ऐसी विरासत है, जो पीढ़ियों से लोगों की जिंदगी में घुली हुई है। यहां की इमरती की मिठास, एटमबम की अनोखी बनावट और मूली का विशाल आकार लोगों को हैरान भी करता है और आकर्षित भी।
जौनपुर की इमरती : स्वाद में मिठास, परंपरा में गहराई
जौनपुर की इमरती का नाम सुनते ही लोगों के मन में देसी घी की खुशबू और चाशनी में डूबी गोल-गोल मिठास की तस्वीर उभर आती है। यह केवल मिठाई नहीं, बल्कि जौनपुर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।
स्थानीय इतिहासकारों का मानना है कि जौनपुर में इमरती बनाने की परंपरा कई सौ साल पुरानी है। पुराने समय में यहां के हलवाई विशेष अवसरों, मेलों और शादियों में इमरती बनाते थे। धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि यह जौनपुर की पहचान बन गई।
जौनपुर की इमरती की खास बात उसका स्वाद और उसकी बनावट है। इसे उड़द की दाल से तैयार किया जाता है और फिर देसी घी या शुद्ध तेल में धीमी आंच पर पकाया जाता है। इसके बाद इसे खास चाशनी में डुबोया जाता है, जिससे इसका स्वाद लंबे समय तक बरकरार रहता है।
आज भी जौनपुर के कई पुराने बाजारों में ऐसी दुकानें मौजूद हैं, जहां पीढ़ियों से एक ही परिवार इमरती बनाने का काम कर रहा है। आधुनिक मिठाइयों और बड़े ब्रांडों के दौर में भी जौनपुर की इमरती की मांग कम नहीं हुई है।
आखिर क्या है ‘एटमबम’ मिठाई की कहानी?
जौनपुर की सबसे अनोखी पहचान अगर किसी मिठाई को लेकर बनी है तो वह है ‘एटमबम’। नाम सुनते ही लोगों के मन में जिज्ञासा पैदा होती है कि आखिर मिठाई का नाम एटमबम क्यों पड़ा?
स्थानीय लोगों के अनुसार यह मिठाई आकार में बड़ी और स्वाद में बेहद भारी होती है, इसलिए इसे मजाकिया अंदाज में ‘एटमबम’ कहा जाने लगा। धीरे-धीरे यही नाम इसकी पहचान बन गया।
यह मिठाई खोआ, सूखे मेवे, चीनी और देसी स्वाद के मिश्रण से तैयार की जाती है। कुछ दुकानदार इसमें खास मसाले और मेवा भी मिलाते हैं, जिससे इसका स्वाद और भी अलग हो जाता है। बाहर से मजबूत दिखने वाली यह मिठाई अंदर से बेहद मुलायम होती है।
जौनपुर आने वाले पर्यटक अक्सर इस मिठाई को खरीदकर अपने साथ ले जाते हैं। सोशल मीडिया और यूट्यूब के दौर में ‘एटमबम’ मिठाई की लोकप्रियता और तेजी से बढ़ी है। अब यह केवल जौनपुर तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश के कई हिस्सों में इसकी चर्चा होने लगी है।
जौनपुरी मूली : आकार देखकर लोग रह जाते हैं हैरान
जौनपुर की मूली सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि अपने असाधारण आकार के लिए मशहूर है। यहां कई इलाकों में ऐसी मूली पैदा होती है, जिसकी लंबाई और वजन सामान्य मूली से कई गुना ज्यादा होता है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जौनपुर की उपजाऊ मिट्टी और यहां की जलवायु इस मूली के लिए बेहद अनुकूल है। खासकर गोमती नदी के किनारे वाले क्षेत्रों में उगाई जाने वाली मूली की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है।
पुराने समय में गांवों के मेलों और कृषि प्रदर्शनियों में जौनपुरी मूली आकर्षण का केंद्र होती थी। कई बार इसकी लंबाई लोगों के लिए आश्चर्य का विषय बन जाती थी। यही कारण है कि यह मूली धीरे-धीरे जौनपुर की पहचान बन गई।
आज भी सर्दियों के मौसम में जौनपुर की मंडियों में बड़ी संख्या में यह मूली बिकती है। लोग इसे सलाद, पराठा और अन्य देसी व्यंजनों में इस्तेमाल करते हैं।
जब स्वाद ही था पहचान का सबसे बड़ा माध्यम
आज से कई दशक पहले जब सोशल मीडिया और बड़े विज्ञापन नहीं थे, तब किसी शहर की पहचान उसके स्वाद और स्थानीय उत्पादों से बनती थी। जौनपुर की इमरती और मूली भी उसी दौर में प्रसिद्ध हुईं।
रेलवे और सड़क संपर्क बढ़ने के बाद जौनपुर के लोग दूसरे शहरों में इन चीजों को लेकर जाने लगे। धीरे-धीरे यहां का स्वाद बनारस, प्रयागराज, लखनऊ और दिल्ली तक पहुंच गया।
पुराने लोग बताते हैं कि पहले शादी-ब्याह में जौनपुर की इमरती खास तौर पर मंगवाई जाती थी। वहीं किसान अपनी बड़ी मूली को गर्व के साथ प्रदर्शित करते थे।
बदलते दौर में भी कायम है पहचान
आज फास्ट फूड और आधुनिक खानपान का दौर है, लेकिन इसके बावजूद जौनपुर के पारंपरिक स्वाद की लोकप्रियता बनी हुई है। इसका सबसे बड़ा कारण है इन व्यंजनों का प्राकृतिक स्वाद और स्थानीय जुड़ाव।
हाल के वर्षों में सोशल मीडिया ने भी इन व्यंजनों को नई पहचान दी है। कई फूड ब्लॉगर और यूट्यूबर जौनपुर की इमरती, एटमबम और मूली पर वीडियो बना चुके हैं। इससे युवा पीढ़ी में भी इन चीजों को लेकर रुचि बढ़ी है।
हालांकि कुछ चुनौतियां भी सामने हैं। बढ़ती मिलावट, पारंपरिक हलवाइयों की घटती संख्या और आधुनिक बाजार की प्रतिस्पर्धा इन व्यंजनों की मौलिकता पर असर डाल रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि गुणवत्ता और परंपरा को सुरक्षित नहीं रखा गया तो आने वाले समय में असली स्वाद प्रभावित हो सकता है।
‘टेस्ट ऑफ यूपी’ से खुलेंगे नए अवसर
योगी सरकार की ‘एक जनपद एक व्यंजन’ योजना जौनपुर के लिए नए अवसर लेकर आई है। इससे यहां के पारंपरिक व्यंजनों को सरकारी स्तर पर पहचान मिलेगी और उन्हें बड़े बाजार से जोड़ा जा सकेगा।
फूड टूरिज्म के बढ़ते दौर में जौनपुर का स्वाद भी पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है। यदि इमरती, एटमबम और जौनपुरी मूली की ब्रांडिंग बेहतर तरीके से की जाए तो यह स्थानीय रोजगार बढ़ाने में भी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जौनपुर में फूड फेस्टिवल, पारंपरिक मिठाई मेले और कृषि प्रदर्शनियों का आयोजन कर इन उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर और लोकप्रिय बनाया जा सकता है।
स्वाद के साथ जुड़ी है जौनपुर की आत्मा
जौनपुर की इमरती केवल मिठाई नहीं, एटमबम केवल स्वाद नहीं और जौनपुरी मूली केवल सब्जी नहीं है। ये तीनों उस मिट्टी की पहचान हैं, जहां परंपरा आज भी जिंदा है।
समय बदल रहा है, खानपान की आदतें बदल रही हैं, लेकिन जौनपुर का देसी स्वाद आज भी लोगों को अपनी ओर खींचता है। यही कारण है कि ‘टेस्ट ऑफ यूपी’ में जौनपुर का नाम सिर्फ एक जिले के रूप में नहीं, बल्कि स्वाद की एक अनोखी विरासत के रूप में दर्ज हो चुका है।
क्लिकेबल सवाल-जवाब : जौनपुर का स्वाद
जौनपुर की इमरती क्यों मशहूर है?
जौनपुर की इमरती अपनी खास बनावट, देसी स्वाद और चाशनी की संतुलित मिठास के लिए मशहूर है। इसे उड़द की दाल से तैयार किया जाता है और यह जौनपुर की पारंपरिक मिठाई पहचान बन चुकी है।
‘एटमबम’ मिठाई का नाम इतना चर्चित क्यों है?
‘एटमबम’ मिठाई अपने बड़े आकार, भरपूर खोआ, मेवे और अनोखे स्वाद के कारण चर्चित है। इसका नाम ही लोगों में उत्सुकता पैदा करता है, इसलिए यह जौनपुर की खास मिठाई पहचान बन गई है।
जौनपुरी मूली की खासियत क्या है?
जौनपुरी मूली अपने विशाल आकार, अलग स्वाद और स्थानीय खेती की विशेष पहचान के लिए प्रसिद्ध है। गोमती नदी के आसपास की उपजाऊ मिट्टी और मौसम इसकी गुणवत्ता को खास बनाते हैं।
क्या जौनपुर के ये स्वाद ‘टेस्ट ऑफ यूपी’ में शामिल हैं?
हां, ‘एक जनपद एक व्यंजन’ योजना के तहत जौनपुर की इमरती, एटमबम मिठाई और जौनपुरी मूली को जिले की खास खाद्य पहचान के रूप में प्रमुखता दी गई है।
इन व्यंजनों से स्थानीय कारोबार को कैसे लाभ मिलेगा?
सरकारी पहचान और प्रचार मिलने से इन उत्पादों की मांग बढ़ेगी। इससे हलवाई, किसान, छोटे दुकानदार और स्थानीय कारोबारियों को बेहतर बाजार और रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।
जौनपुर के पारंपरिक स्वाद को बचाना क्यों जरूरी है?
ये व्यंजन केवल खाने की चीजें नहीं, बल्कि जौनपुर की संस्कृति, इतिहास और स्थानीय पहचान का हिस्सा हैं। इन्हें संरक्षित करना आने वाली पीढ़ियों को अपनी खाद्य विरासत से जोड़ने के लिए जरूरी है।











