“साहब, मैं अभी जिंदा हूँ”, राजस्व अभिलेख की बड़ी लापरवाही उजागर, डीएम ने दिए तत्काल सुधार के आदेश
सरकारी कागजों में जीवित किसान को घोषित कर दिया गया मृत, सम्पूर्ण समाधान दिवस में पहुंचकर लगाई गुहार
जगदंबा उपाध्याय की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति को सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वह पूरी तरह जीवित है और अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन जी रहा है। जब उसे इस गलती की जानकारी हुई तो वह सीधे अधिकारियों के सामने पहुंच गया और कहा, “साहब, मैं अभी जिंदा हूँ।”
यह मामला बिल्थरा रोड तहसील क्षेत्र के सरया गांव का है, जहां राजस्व अभिलेखों में हुई एक बड़ी त्रुटि के कारण जीवित व्यक्ति की पहचान ही सरकारी रिकॉर्ड से समाप्त कर दी गई। शिकायत सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और तत्काल सुधार के निर्देश जारी किए गए।
सम्पूर्ण समाधान दिवस में सामने आया मामला
बिल्थरा रोड तहसील में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह और पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह लोगों की शिकायतें सुन रहे थे। इसी दौरान सरया गांव निवासी चंद्रशेखर अधिकारियों के समक्ष पहुंचे और अपनी पीड़ा सुनाई।
चंद्रशेखर ने बताया कि राजस्व अभिलेखों और खतौनी में उन्हें मृत दिखा दिया गया है। इतना ही नहीं, उनके नाम के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज कर दिया गया। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि जिस व्यक्ति का नाम उनके स्थान पर दर्ज किया गया है, उसकी भी अब मृत्यु हो चुकी है। शिकायत सुनते ही अधिकारी चौंक गए और मामले की तत्काल जांच के निर्देश दिए गए।
डीएम ने दिखाई सख्ती
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने संबंधित लेखपाल को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाना अत्यंत गंभीर लापरवाही है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
डीएम ने मौके पर ही निर्देश दिया कि चंद्रशेखर का नाम तत्काल खतौनी में बहाल किया जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आदेश का समयबद्ध पालन नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
जांच में सामने आई पूरी सच्चाई
मामले की जांच उप जिलाधिकारी शरद चौधरी की निगरानी में कराई गई। जांच के दौरान पता चला कि सरया गांव के निवासी श्याम सुंदर, चंद्रशेखर और राजेंद्र तीन सगे भाई हैं।
इनमें से राजेंद्र की वर्ष 2018 में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद वर्ष 2021 में नामांतरण की प्रक्रिया के दौरान राजस्व रिकॉर्ड में संशोधन किया गया। इसी प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही हुई और मृतक राजेंद्र के बजाय जीवित चंद्रशेखर को मृत दर्शा दिया गया। परिणामस्वरूप राजस्व अभिलेखों में चंद्रशेखर का नाम हट गया और सरकारी रिकॉर्ड में उनकी स्थिति मृत व्यक्ति के रूप में दर्ज हो गई।
पांच वर्षों तक नहीं सुधरी गलती
सबसे चिंताजनक बात यह है कि वर्ष 2021 में हुई यह गलती कई वर्षों तक राजस्व विभाग की नजरों से ओझल रही। इस दौरान पीड़ित को अपनी जमीन और राजस्व संबंधी मामलों में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में खतौनी और भूमि अभिलेखों का विशेष महत्व होता है। ऐसे में किसी व्यक्ति को कागजों पर मृत घोषित कर देना उसके संपत्ति अधिकारों, उत्तराधिकार संबंधी दावों और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस प्रकार की त्रुटियां नहीं सुधारी जाएं तो भविष्य में बड़े भूमि विवाद और कानूनी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
दोषी कर्मचारी पहले से निलंबित
एसडीएम शरद चौधरी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि नामांतरण प्रक्रिया के दौरान संबंधित राजस्व कर्मी की लापरवाही के कारण यह गंभीर त्रुटि हुई थी।
उन्होंने बताया कि जिस राजस्व कर्मी आलोक पांडेय के कार्यकाल में यह गलती हुई थी, वह पहले से ही किसी अन्य मामले में निलंबित चल रहा है। हालांकि वर्तमान मामले की भी समीक्षा की जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जल्द बहाल होगा नाम
तहसील प्रशासन का कहना है कि राजस्व अभिलेखों में सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही खतौनी में चंद्रशेखर का नाम दोबारा दर्ज कर दिया जाएगा और उन्हें उनके अधिकार वापस मिल जाएंगे।
प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि मामले का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है ताकि पीड़ित को आगे किसी प्रकार की परेशानी न उठानी पड़े।
व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
यह घटना केवल एक व्यक्ति की परेशानी भर नहीं है, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड के रखरखाव और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है। डिजिटल युग में जब अधिकांश अभिलेख ऑनलाइन उपलब्ध हैं, तब भी इस तरह की त्रुटियों का वर्षों तक बने रहना चिंता का विषय है।
फिलहाल जिलाधिकारी के हस्तक्षेप से चंद्रशेखर को राहत मिलने की उम्मीद जगी है, लेकिन यह मामला प्रशासनिक मशीनरी के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है कि अभिलेखों के रखरखाव में जरा सी लापरवाही किसी नागरिक के अधिकारों और पहचान को प्रभावित कर सकती है।








