‘फेसबुक की दोस्ती से “पांच” निकाह तक…’ हिंदू युवती का दावा- धर्म परिवर्तन, हलाला और दरिंदगी ने बर्बाद कर दी जिंदगी
कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर से जुड़ा एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें मध्यप्रदेश की एक महिला ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उसे प्यार के जाल में फंसाकर पहले बंधक बनाया गया, फिर जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया और इसके बाद लगातार कई निकाह तथा हलाला जैसी प्रक्रियाओं से गुजरने को मजबूर किया गया। पीड़िता का आरोप है कि करीब एक दशक तक उसके साथ शारीरिक, मानसिक और धार्मिक प्रताड़ना की गई।
गाजियाबाद के अंकुर विहार थाने में दर्ज एफआईआर के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। एक आरोपी को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। वहीं महिला की आपबीती सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन गया है।
फेसबुक पर हुई दोस्ती, फिर शुरू हुआ जिंदगी का सबसे खतरनाक दौर
31 वर्षीय पीड़िता मूल रूप से मध्यप्रदेश के इंदौर की रहने वाली है। महिला का कहना है कि वर्ष 2012 में जब वह बीबीए की पढ़ाई कर रही थी, उसी दौरान फेसबुक पर उसकी दोस्ती एक युवक से हुई। युवक ने अपना नाम “नवीन राणा” बताया था। बातचीत धीरे-धीरे गहरी होती गई और दोनों लगातार संपर्क में रहने लगे।
महिला के मुताबिक युवक एक बार इंदौर भी पहुंचा था। उसने भरोसा जीतने के लिए उसे मोबाइल फोन और सिम कार्ड दिया। कुछ समय बाद वह वापस चला गया, लेकिन दोनों की बातचीत जारी रही। फिर 2013 में युवक ने महिला को दिल्ली बुलाया। भरोसा कर वह इंदौर से दिल्ली पहुंच गई। यहीं से उसकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने उसे वर्षों तक दर्द, हिंसा और कैद के अंधेरे में धकेल दिया।
मुजफ्फरनगर के मदरसे में ले जाकर बनाया बंधक
महिला का आरोप है कि दिल्ली पहुंचने के बाद युवक उसे उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के फलत क्षेत्र स्थित एक मदरसे में ले गया। वहां कुछ दिन रुकने के बाद युवक यह कहकर चला गया कि उसकी मां का एक्सीडेंट हो गया है। इसी दौरान महिला को पता चला कि युवक का असली नाम “नावेद” है।
पीड़िता का कहना है कि इसके बाद उसे मदरसे में ही बंधक बना लिया गया। उसने आरोप लगाया कि वहां मौजूद मौलाना और अन्य लोगों ने उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। विरोध करने पर मारपीट की गई और जबरन बुर्का पहनाया गया। महिला ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि उससे कहा गया कि अब वह मुस्लिम बन चुकी है और उसे वहीं रहना होगा। उसके अनुसार, उसे मानसिक रूप से तोड़ने के लिए लगातार दबाव बनाया जाता था।
25 साल बड़े मौलाना से कराया गया निकाह
महिला के मुताबिक कुछ दिनों बाद उसे मेरठ ले जाया गया, जहां वह करीब छह महीने तक एक मदरसे में रही। इसके बाद फिर मुजफ्फरनगर ले जाकर उससे उम्र में करीब 25 साल बड़े एक मौलाना अब्दुर रहमान से निकाह करा दिया गया।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि निकाह के बाद उसके साथ लगातार दुष्कर्म किया गया। विरोध करने पर बेरहमी से पीटा जाता था। उसने कहा कि नमाज पढ़ने के लिए दबाव डाला जाता था और मना करने पर उसे निर्वस्त्र कर पीटा जाता था। महिला का दावा है कि कुछ ही महीनों बाद उसे “तीन तलाक” दे दिया गया। इसके बाद उसे इद्दत की अवधि में अलग रखा गया और फिर दूसरी जगह भेज दिया गया।
हलाला के नाम पर शोषण का आरोप
महिला ने अपने बयान में आरोप लगाया कि तलाक के बाद उसे जयपुर के एक मदरसे में ले जाया गया, जहां हलाला की प्रक्रिया के नाम पर कई दिनों तक उसका यौन शोषण किया गया। उसने कहा कि विरोध करने पर मारपीट और धमकियां दी जाती थीं।
इसके बाद उसका दूसरा निकाह शामली निवासी मुदसिर नाम के युवक से कराया गया। महिला के अनुसार वह उसे गुजरात ले गया, जहां वह वेल्डिंग का काम करता था। कुछ वर्षों तक वह वहीं रही, लेकिन 2019 में मुदसिर की मौत हो गई।
इस दौरान महिला अपने परिवार से पूरी तरह कट चुकी थी। उसका कहना है कि उसे लगातार अलग-अलग लोगों और स्थानों के बीच रखा जाता रहा, ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके।
तीसरा, चौथा और फिर पांचवां निकाह
महिला का आरोप है कि गुजरात में उसकी मुलाकात एक मौलाना से हुई, जिसने उसे दिल्ली और फिर बागपत पहुंचाया। वहां उसका तीसरा निकाह खालिद हुसैन नामक व्यक्ति से कराया गया।
कुछ समय बाद वहां भी प्रताड़ना शुरू हो गई। महिला का दावा है कि 2022 में खालिद ने उसे तलाक दे दिया। बाद में कहा गया कि दोबारा निकाह के लिए हलाला जरूरी होगा। इसके बाद उसका निकाह फकरुद्दीन नाम के व्यक्ति से कराया गया।
महिला ने आरोप लगाया कि इस दौरान उसके साथ गैंगरेप भी किया गया। बाद में फिर से तलाक देकर खालिद के साथ दोबारा निकाह कराया गया। इस तरह उससे कुल पांच निकाह कराए गए और दो बार हलाला की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
भाजपा विधायक तक पहुंची पीड़िता, फिर दर्ज हुई एफआईआर
पीड़िता का कहना है कि लंबे समय तक प्रताड़ना सहने के बाद वह किसी तरह आरोपियों के चंगुल से बाहर निकली। इसके बाद उसने भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर से संपर्क किया। विधायक की मदद से वह पुलिस तक पहुंच सकी। 5 मई को महिला ने गाजियाबाद के अंकुर विहार थाने में विस्तृत शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उसने 13 नामजद समेत 16 लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
एफआईआर में जबरन धर्म परिवर्तन, दुष्कर्म, बंधक बनाकर रखने, हलाला, कई निकाह कराने, शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना और जान से मारने की धमकी जैसी धाराएं शामिल की गई हैं।
पुलिस जांच में जुटी, एक आरोपी गिरफ्तार
गाजियाबाद पुलिस के अनुसार मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है। पुलिस ने बताया कि पीड़िता अलग-अलग राज्यों और जिलों में रहने की बात कह रही है, इसलिए विभिन्न स्थानों से तथ्य जुटाए जा रहे हैं।
डीसीपी देहात सुरेंद्रनाथ तिवारी ने बताया कि महिला के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। बाकी आरोपियों की तलाश और मामले की जांच जारी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या यह मामला किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ है या फिर इसमें अन्य लोग भी शामिल रहे हैं।
सोशल मीडिया पर गरमाया मामला, उठने लगे कई सवाल
महिला की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक वर्ग इसे “लव जिहाद”, जबरन धर्म परिवर्तन और महिलाओं के शोषण से जोड़कर देख रहा है, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच होनी चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला मानवाधिकार, महिला सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े बेहद गंभीर अपराधों की श्रेणी में आएगा।
वहीं महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी भी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध धर्म, विवाह या शारीरिक संबंधों के लिए मजबूर करना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में पीड़िता को सुरक्षा, कानूनी सहायता और मानसिक सहयोग उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
पीड़िता फिलहाल अकेले रह रही, सुरक्षा की मांग
महिला फिलहाल गाजियाबाद में दिल्ली सीमा के पास किराए के मकान में अकेली रह रही है। उसने अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है। महिला का कहना है कि वह अब सामान्य जिंदगी जीना चाहती है, लेकिन बीते 13 सालों की यातनाएं आज भी उसका पीछा नहीं छोड़ रही हैं।
यह मामला सिर्फ एक महिला की आपबीती नहीं, बल्कि उन तमाम सवालों को भी सामने लाता है जो महिला सुरक्षा, ऑनलाइन संबंधों, धार्मिक कट्टरता और कानून व्यवस्था पर लगातार उठते रहे हैं। अब सबकी नजर पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया पर टिकी हुई है।







