श्रृंगार रस
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विचार
गालों की लाली, आंखों की मस्ती और चाल की लय : नारी-सौंदर्य का गहरा दर्शन
– अनिल अनूप मानव सभ्यता के आरंभ से ही नारी-सौंदर्य केवल आकर्षण का विषय नहीं रहा, बल्कि वह संवेदना, संस्कृति,…
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बदतमीजी दिल की
“राजा रंगबाज़ हमरा लाज लागे” : भोजपुरी लोकभावना में प्रेम, संकोच और आकर्षण की अनकही कथा
🖊️ अनिल अनूप भोजपुरी लोकसंगीत की परंपरा में एक छोटी-सी पंक्ति भी भावनाओं, संस्कृति और सामाजिक मनोविज्ञान का विराट संसार…
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