विश्व पर्यावरण दिवस पर राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने किया वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
विश्व पर्यावरण दिवस पर राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने किया वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिले में पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसी क्रम में राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने वन विभाग द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में भाग लेते हुए डेहरी स्थित राजकीय पार्क में वृक्षारोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान राज्यमंत्री ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण पर्यावरणीय चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने कहा कि वृक्ष केवल ऑक्सीजन प्रदान नहीं करते, बल्कि जल संरक्षण, भूमि संरक्षण और जैव विविधता को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पर्यावरण संरक्षण जनभागीदारी से ही संभव
राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा समय-समय पर चलाए जा रहे वृक्षारोपण अभियानों का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जनजागरण पैदा करना है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में पर्यावरणीय संतुलन को काफी हद तक बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्होंने युवाओं, विद्यार्थियों और सामाजिक संगठनों से पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसके लिए आज से ही गंभीर प्रयास करने होंगे।
राजकीय पार्क में लगाए गए पौधे
कार्यक्रम के दौरान राजकीय पार्क परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए। वन विभाग के अधिकारियों ने उपस्थित लोगों को पौधों के महत्व, उनकी देखभाल और पर्यावरणीय लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि वृक्षारोपण तभी सफल माना जाएगा जब लगाए गए पौधों का संरक्षण और नियमित रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाए।
वन विभाग की ओर से लोगों को पर्यावरण संरक्षण संबंधी जागरूकता संदेश भी दिए गए। उपस्थित ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रही सहभागिता
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों तथा स्थानीय नागरिकों की उल्लेखनीय सहभागिता देखने को मिली। मंडल अध्यक्ष पुनीत यादव, जिला मंत्री अभिषेक जायसवाल, अभय तिवारी, अखिलेश योगी, राजीव मिश्रा, अनूप उपाध्याय, अजय दूबे, ग्राम प्रधान विकास, ग्राम विकास अधिकारी अदिति दुबे सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
वन विभाग के अधिकारी गौतम कुमार ने कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वृक्ष मानव जीवन का आधार हैं। उन्होंने बताया कि वन विभाग द्वारा लगातार वृक्षारोपण अभियान चलाकर हरित क्षेत्र बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को किया गया जागरूक
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित ग्रामीणों को प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, जल संरक्षण अपनाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि जीवनभर चलने वाली प्रक्रिया है।
उन्होंने बताया कि बढ़ती गर्मी, अनियमित वर्षा, जल संकट और प्रदूषण जैसी समस्याएं सीधे तौर पर पर्यावरणीय असंतुलन का परिणाम हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
हरित भविष्य के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया। राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने अंत में कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना केवल सरकार का दायित्व नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपने घर, गांव और आसपास के क्षेत्रों को हरा-भरा बनाने की अपील करते हुए कहा कि एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य के लिए आज से ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह वृक्षारोपण कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने और हरित भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।








