अति पिछड़ा अधिकार सम्मेलन में गूंजा सामाजिक न्याय का मुद्दा, जौनपुर से लखनऊ-दिल्ली तक लड़ाई का ऐलान
राम कीर्ति यादव की रिपोर्ट
जौनपुर जिले के जलालपुर स्थित बयालसी कॉलेज मैदान में रविवार को आयोजित अति पिछड़ा अधिकार सम्मेलन राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से चर्चा का केंद्र बना रहा। भारतीय मानव समाज पार्टी, राष्ट्रीय उदय पार्टी और ऑल इंडिया पीपल्स फ्रंट पार्टी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महारैली में अति पिछड़ा समाज की राजनीतिक भागीदारी, आरक्षण में वर्गीकरण, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। सम्मेलन में बड़ी संख्या में विभिन्न जिलों से पहुंचे लोगों ने भाग लिया और अपने अधिकारों को लेकर एकजुटता दिखाई।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि पूर्व ब्लॉक प्रमुख एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता संदीप सिंह रहे। उनके अलावा भारतीय मानव समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष केवट रामधनी बिंद, राष्ट्र उदय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबू राम पाल तथा ऑल इंडिया पीपल्स फ्रंट के संस्थापक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह सहित कई सामाजिक और राजनीतिक नेताओं ने मंच साझा किया।
अति पिछड़ों के अधिकारों की लड़ाई को लेकर दिखी एकजुटता
सम्मेलन के दौरान मंच से बार-बार यह संदेश दिया गया कि देश और प्रदेश में अति पिछड़ा समाज को अब केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। वक्ताओं ने कहा कि वर्षों से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से उपेक्षित समाज को अब उसके अधिकार मिलने चाहिए। इसके लिए संगठित आंदोलन और राजनीतिक दबाव दोनों जरूरी हैं।
मुख्य अतिथि संदीप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी अति पिछड़े समाज के विकास और सम्मान के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय तभी संभव है जब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी बराबरी का अवसर मिले।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट और केंद्र सरकार स्तर पर गठित जस्टिस जी रोहिणी आयोग की रिपोर्ट को लागू कराने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण व्यवस्था में वर्गीकरण समय की आवश्यकता बन चुका है।
आरक्षण में वर्गीकरण पर जोर
संदीप सिंह ने कहा कि वर्तमान आरक्षण व्यवस्था में कई वर्गों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। कुछ जातियां लगातार लाभ ले रही हैं जबकि अत्यंत पिछड़े समुदाय अब भी पीछे छूटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को आरक्षण के भीतर वर्गीकरण के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि वास्तविक जरूरतमंद समुदायों तक योजनाओं और आरक्षण का लाभ पहुंच सके।
उन्होंने भरोसा जताया कि उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएंगी। साथ ही उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों की मांग करना किसी भी नागरिक का संवैधानिक और जन्मसिद्ध अधिकार है। इस संघर्ष में वे अति पिछड़ा समाज के साथ मजबूती से खड़े हैं।
“लखनऊ से दिल्ली तक लड़ी जाएगी लड़ाई”
भारतीय मानव समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष केवट रामधनी बिंद ने अपने संबोधन में कहा कि अति पिछड़े समाज को अब राजनीतिक और आर्थिक भागीदारी दिलाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से यह समाज केवल आश्वासन सुनता आया है, लेकिन अब अधिकार लेकर रहेगा।
उन्होंने मंच से घोषणा करते हुए कहा कि अति पिछड़ों के सम्मान और हिस्सेदारी की लड़ाई लखनऊ से लेकर दिल्ली तक लड़ी जाएगी। उन्होंने लोगों से संगठित होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की आवाज बुलंद करने का आह्वान किया।
रामधनी बिंद ने कहा कि यदि समाज राजनीतिक रूप से मजबूत होगा तभी शिक्षा, रोजगार और विकास योजनाओं में उसकी वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।
जातिवादी राजनीति पर साधा निशाना
राष्ट्र उदय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबू राम पाल ने सम्मेलन के दौरान कई राजनीतिक दलों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जातिवादी दल चुनाव के समय पिछड़े और अति पिछड़े समाज के नाम पर राजनीति करते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हीं मुद्दों को भूल जाते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्षों से लोगों को भावनात्मक मुद्दों में उलझाकर उनके वास्तविक अधिकारों से दूर रखा गया। अब समाज जागरूक हो चुका है और वह अपने अधिकारों तथा सम्मान को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि अति पिछड़े समाज को केवल राजनीतिक भाषण नहीं बल्कि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आर्थिक अवसरों में वास्तविक हिस्सेदारी चाहिए।
शिक्षा, रोजगार और महंगाई पर भी उठे सवाल
ऑल इंडिया पीपल्स फ्रंट के संस्थापक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज देश में शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है, जिससे गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना मुश्किल होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा और सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरतें आज सबसे बड़ा मुद्दा हैं। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि अति पिछड़े समाज के इन सवालों को मुख्यधारा की राजनीति में पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा।
उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने भी अति पिछड़ों के आंदोलन को वह समर्थन नहीं दिया जिसकी अपेक्षा थी। उन्होंने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने पिछड़ों के भीतर अति पिछड़ों के लिए अलग कोटा तय करने की ऐतिहासिक पहल की थी। उसी सोच को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
बड़ी संख्या में पहुंचे लोग, पूरे दिन चला सम्मेलन
बयालसी कॉलेज मैदान में सुबह से ही लोगों का जुटान शुरू हो गया था। विभिन्न जिलों से आए कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सम्मेलन में भाग लिया। मंच के सामने बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं की मौजूदगी भी देखने को मिली।
सम्मेलन के दौरान कई बार सामाजिक न्याय और अधिकारों को लेकर नारे लगाए गए। वक्ताओं ने समाज को शिक्षा और संगठन की ताकत समझाने पर जोर दिया। आयोजन स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्था के भी विशेष इंतजाम किए गए थे।
सम्मेलन का संचालन अशोक बिंद ने किया। उन्होंने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह सम्मेलन अति पिछड़ा समाज की आवाज को मजबूत करने का प्रयास है।
राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा सम्मेलन
राजनीतिक जानकार इस सम्मेलन को आने वाले समय की राजनीति से जोड़कर भी देख रहे हैं। उत्तर प्रदेश में पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग चुनावी राजनीति का बड़ा आधार माना जाता है। ऐसे में आरक्षण में वर्गीकरण और हिस्सेदारी जैसे मुद्दे भविष्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अति पिछड़ा समाज अब केवल प्रतीकात्मक राजनीति नहीं बल्कि नीति निर्माण में भी अपनी हिस्सेदारी चाहता है। यही कारण है कि ऐसे सम्मेलन लगातार चर्चा का विषय बन रहे हैं।











