सीआरपीएफ लिखे वाहन में छिपाकर लाई जा रही थी नशे की करोड़ों की खेप, देवरिया में STF-NCB की बड़ी कार्रवाई, 4 तस्कर गिरफ्तार
असम से यूपी तक फैला था नेटवर्क, 4 क्विंटल से अधिक गांजा बरामद
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत देवरिया में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की संयुक्त टीम ने लार और सलेमपुर कोतवाली क्षेत्र की सीमा पर स्थित सहला गांव के पास छापेमारी कर 4.03 क्विंटल गांजा बरामद किया है। इस कार्रवाई में चार अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बरामद गांजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपये आंकी गई है।
यह कार्रवाई केवल भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने तस्करों के उस शातिर नेटवर्क को भी उजागर किया है जो सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित करने के लिए सरकारी सुरक्षा बलों के नाम और पहचान का इस्तेमाल कर रहा था।
सीआरपीएफ लिखे वाहन का किया जा रहा था इस्तेमाल
जांच एजेंसियों के अनुसार तस्करों ने जिस वाहन का इस्तेमाल किया था, उस पर बड़े अक्षरों में “सीआरपीएफ” लिखा हुआ था। वाहन की बाहरी बनावट भी इस तरह तैयार की गई थी कि देखने वालों को लगे कि कोई सुरक्षा बल का जवान अपने घरेलू सामान के साथ यात्रा कर रहा है। इसी आड़ में तस्कर नशे की बड़ी खेप को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाने की योजना बना रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वाहन को जानबूझकर ऐसा स्वरूप दिया गया था ताकि पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों की निगाहों से बचा जा सके।
हालांकि, एसटीएफ और एनसीबी को पहले से मिली खुफिया सूचना के आधार पर टीमों ने संयुक्त रणनीति तैयार की और सहला गांव के समीप घेराबंदी कर संदिग्ध वाहन को रोक लिया। तलाशी के दौरान वाहन से भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ।
खुफिया सूचना बनी बड़ी सफलता का आधार
सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ समय से एजेंसियों को पूर्वोत्तर भारत से उत्तर प्रदेश और बिहार की ओर बड़े पैमाने पर गांजे की तस्करी की जानकारी मिल रही थी। लगातार निगरानी और तकनीकी सर्विलांस के बाद टीमों को एक विशेष खेप के बारे में सटीक सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही एसटीएफ और एनसीबी की संयुक्त टीम सक्रिय हो गई। कई घंटों तक निगरानी रखने के बाद संदिग्ध वाहन की पहचान की गई और उसे रोककर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान वाहन में छिपाकर रखे गए गांजे के पैकेट बरामद हुए।
अधिकारियों का कहना है कि यदि यह खेप अपने गंतव्य तक पहुंच जाती तो इसका इस्तेमाल विभिन्न जिलों और राज्यों में छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अवैध बिक्री के लिए किया जाता।
देवरिया के दो युवकों की भूमिका आई सामने
पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। जांच में पता चला है कि देवरिया जिले के रहने वाले रितेश और आदर्श जायसवाल इस पूरे नेटवर्क के प्रमुख संचालकों में शामिल हैं। एजेंसियों का मानना है कि यही दोनों आरोपी पूर्वोत्तर राज्यों से मादक पदार्थ मंगवाने और उन्हें विभिन्न राज्यों तक पहुंचाने की रणनीति तैयार करते थे।
गिरफ्तार चार आरोपियों में दो मध्य प्रदेश के निवासी बताए जा रहे हैं, जबकि अन्य की भूमिका और संपर्कों की भी गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों को आशंका है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और कई राज्यों में इसकी जड़ें फैली हुई हैं।
असम से आती थी खेप, कई राज्यों में होती थी सप्लाई
प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि गांजे की यह खेप असम से लाई गई थी। तस्कर इसे उत्तर प्रदेश, बिहार और आसपास के अन्य राज्यों में सप्लाई करने की तैयारी में थे।
नशा तस्करी के इस नेटवर्क की कार्यप्रणाली काफी संगठित बताई जा रही है। खेप को पहले पूर्वोत्तर भारत से मध्य भारत तक पहुंचाया जाता था और वहां से अलग-अलग मार्गों के जरिए विभिन्न राज्यों में भेजा जाता था। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा किन जिलों में इसकी आपूर्ति की जाती रही है।
करोड़ों के कारोबार की परतें खुलने की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि 4 क्विंटल से अधिक गांजे की बरामदगी कोई सामान्य घटना नहीं है। इतनी बड़ी मात्रा यह संकेत देती है कि इसके पीछे संगठित आपराधिक नेटवर्क काम कर रहा है।
बरामद खेप की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 1.20 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस नेटवर्क का कारोबार करोड़ों रुपये का हो सकता है। जांच एजेंसियां अब आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें।
एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज हुआ मुकदमा
गिरफ्तार सभी आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। बरामदगी की मात्रा को देखते हुए आरोपियों पर कठोर धाराएं लगाई गई हैं।
अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के आधार पर अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है। साथ ही नेटवर्क के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज की जांच भी जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि गांजा कहां से खरीदा गया और किन लोगों तक इसकी सप्लाई की जानी थी।
नशा तस्करी के खिलाफ जारी रहेगा अभियान
एसटीएफ और एनसीबी के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। पिछले कुछ वर्षों में नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए विभिन्न एजेंसियां संयुक्त रूप से कार्रवाई कर रही हैं। देवरिया में हुई यह कार्रवाई न केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सतर्कता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि तस्कर चाहे कितने ही नए तरीके अपनाएं, खुफिया तंत्र और तकनीकी निगरानी के सामने उनकी योजनाएं अधिक समय तक सफल नहीं हो सकतीं।
देवरिया में एसटीएफ और एनसीबी की संयुक्त कार्रवाई ने एक बड़े अंतरराज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। सीआरपीएफ लिखे वाहन की आड़ में करोड़ों रुपये का गांजा ढोने की कोशिश कर रहे तस्करों की गिरफ्तारी से यह स्पष्ट हो गया है कि नशा कारोबारियों के तरीके लगातार बदल रहे हैं। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता और समन्वित कार्रवाई के चलते एक बड़ी खेप बाजार तक पहुंचने से पहले ही पकड़ी गई। अब जांच एजेंसियों की नजर इस नेटवर्क से जुड़े उन लोगों पर है जो पर्दे के पीछे रहकर पूरे कारोबार को संचालित कर रहे थे।








