संपादकीय
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संपादकीय
नौतपा : तपती धरती, तमतमाता आसमान और बदलते समय की चेतावनी
संपादक अनिल अनूप भारत की पारंपरिक ऋतु व्यवस्था में “नौतपा” केवल मौसम का एक चरण नहीं, बल्कि प्रकृति की एक…
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संपादकीय
जातिवाद की जंजीरों में जकड़ा हिन्दू समाज आखिर कब जागेगा?
– अनिल अनूपनिष्पक्ष, संवेदनशील और जनपक्षीय दृष्टि के साथ भारत को दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में गिना जाता है।…
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खास बात
सपनों की हत्या का संगठित तंत्र : ‘नीट’ पेपर लीक और टूटता हुआ युवाओं का भरोसा
✍️ मोहन द्विवेदी भारत में कुछ परीक्षाएं केवल परीक्षा नहीं होतीं, वे करोड़ों परिवारों की उम्मीदों, संघर्षों और सामाजिक बदलाव…
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विचार
वट सावित्री : आस्था के धागों में उलझा प्रकृति का मौन प्रश्न
लेखक : अनिल अनूप सच्ची श्रद्धा केवल माथा टेकने में नहीं होती, बल्कि संरक्षण में होती है। जिस वृक्ष से…
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खास बात
दण्ड से धर्म तक : उत्तर प्रदेश में कानून के राज का नया अध्याय
चुन्नीलाल प्रधान की खास रिपोर्ट महाभारत के शांतिपर्व में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को राजधर्म का जो उपदेश दिया था,…
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संपादकीय
अगर खबरें बोल सकतीं, तो वे पत्रकारों से क्या कहतीं?
अनिल अनूप आज के समय में खबरें सिर्फ कागज़ पर छपे शब्द नहीं रहीं। वे मोबाइल स्क्रीन की चमक में…
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संपादकीय
शब्दों के आईने में समाज, संस्कार और सियासत : बदलते भारत की एक जीवंत शाब्दिक यात्रा
-अनिल अनूप समाज कभी एक जगह खड़ा नहीं रहता। वह हर दिन बदलता है, हर पीढ़ी के साथ अपना रंग…
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JGD
बेपरवाही बनाम लापरवाही : आज़ादी और जिम्मेदारी के बीच की अनकही लड़ाई
✍️ अनिल अनूप सूफ़ी परंपरा में शब्द सिर्फ शब्द नहीं होते—वे अनुभव की आग में तपे हुए अर्थ होते हैं।…
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संपादकीय
विश्वास का यह सेतु ; समाचार दर्पण 24 की यात्रा, जनगणदूत का नया पड़ाव
✍️विशेष संपादकीय: अनिल अनूप समय के विस्तृत आकाश में चौदह वर्ष कोई बहुत लंबा कालखंड नहीं माना जाता, किंतु जब…
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