✍️ अनुराग गुप्ता की रिपोर्ट
मंडल ब्यूरो, लखनऊ मंडल | जनगणदूत
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में दूध की गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। संडीला औद्योगिक क्षेत्र स्थित पूनम डेयरी में प्रशासनिक टीम की छापेमारी के दौरान करीब 38 हजार लीटर दूध जब्त किया गया। डेयरी परिसर में दूध के साथ बड़ी मात्रा में केमिकल और अन्य सामग्री मिलने के बाद अधिकारियों ने मिलावट की आशंका जताई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दूध और परिसर में मिली सामग्री के कुल सात नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए हैं।
हालांकि, अभी तक दूध में मिलावट की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई के बाद अब सबकी निगाहें प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जब्त किए गए दूध की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या उसमें किसी प्रकार की मिलावट की गई थी।
संडीला की पूनम डेयरी में छापेमारी से मचा हड़कंप
हरदोई के संडीला औद्योगिक क्षेत्र में स्थित पूनम डेयरी पर मंगलवार शाम प्रशासनिक टीम ने छापा मारा। यह कार्रवाई संयुक्त मजिस्ट्रेट एवं संडीला की उपजिलाधिकारी नारायणी भाटिया के नेतृत्व में की गई। छापेमारी के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। संडीला के अपर पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी श्लोक गौतम भी टीम के साथ कार्रवाई में शामिल थे।
टीम ने डेयरी परिसर में पहुंचकर वहां रखे दूध और अन्य सामग्री की जांच की। इस दौरान दो टैंकरों में बड़ी मात्रा में दूध भरा मिला। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों टैंकरों में मौजूद दूध की कुल मात्रा करीब 38 हजार लीटर थी। जांच के दौरान दूध के अलावा केमिकल और अन्य सामग्री भी मिली, जिसके बाद दूध की शुद्धता को लेकर संदेह गहरा गया।
इसके बाद अधिकारियों ने दूध को जब्त करने की कार्रवाई की और जांच के लिए नमूने एकत्र किए। इतनी बड़ी मात्रा में दूध जब्त किए जाने की घटना ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनकी निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले दूध को मिलावटी घोषित करना उचित नहीं होगा।
दूध और अन्य सामग्री के सात नमूने जांच के लिए भेजे
छापेमारी के दौरान प्रशासनिक एवं संबंधित विभागों की टीम ने कुल सात नमूने एकत्र किए। इन नमूनों को प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा गया है। अब जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि दूध की गुणवत्ता कैसी थी और मौके पर मिली दूसरी सामग्री का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था।
दूध की गुणवत्ता की जांच में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उसमें निर्धारित मानकों से अलग कोई पदार्थ तो मौजूद नहीं है। साथ ही, यदि किसी प्रकार की मिलावट की आशंका की पुष्टि होती है, तो यह भी जांच का विषय होगा कि संबंधित सामग्री का इस्तेमाल दूध में किया गया था या नहीं।
फिलहाल, प्रशासन ने दूध में मिलावट की पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों की कार्रवाई संदेह और मौके पर मिली सामग्री के आधार पर की गई है। सातों नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्रयोगशाला की रिपोर्ट महत्वपूर्ण साक्ष्य होती है। केवल किसी परिसर में केमिकल या अन्य सामग्री मिलने से यह अपने आप साबित नहीं हो जाता कि वहां तैयार या संग्रहित दूध मिलावटी था। इसके लिए नमूनों की वैज्ञानिक जांच और संबंधित तथ्यों का सत्यापन जरूरी है।
आखिर किसके जिम्मे है पूनम डेयरी का संचालन?
अधिकारियों के मुताबिक, पूनम डेयरी का संचालन कथित तौर पर प्रदीप गुप्ता नाम के व्यक्ति द्वारा किया जाता है। छापेमारी के बाद डेयरी में रखे दूध और अन्य सामग्री को लेकर जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
उपजिलाधिकारी नारायणी भाटिया ने बताया कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसका अर्थ है कि फिलहाल प्रशासन जांच के नतीजों का इंतजार कर रहा है और अंतिम निर्णय रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर लिया जाएगा।
यदि जांच में दूध के नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरते या किसी प्रतिबंधित अथवा अनुचित पदार्थ के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई का आधार बन सकता है। हालांकि, कार्रवाई की प्रकृति और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के निष्कर्षों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकेगा।
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट कब तक आएगी। प्रशासन की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आगे की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इसलिए डेयरी संचालक की जिम्मेदारी और कथित मिलावट से जुड़े किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होना आवश्यक है।
38 हजार लीटर दूध जब्त होने से क्यों बढ़ी चिंता?
दूध भारतीय परिवारों के दैनिक खानपान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। घरों में बच्चे, बुजुर्ग और वयस्क सभी इसका सेवन करते हैं। यही वजह है कि दूध की गुणवत्ता में किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका सामने आने पर लोगों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
दूध की गुणवत्ता प्रभावित होने से उसके पोषण संबंधी गुणों पर असर पड़ सकता है। यदि किसी खाद्य पदार्थ में अनुचित रसायन या अन्य पदार्थ मिलाए गए हों, तो उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन संबंधित पदार्थ और उसकी मात्रा के आधार पर किया जाता है। इसलिए दूध की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण, नमूनों की वैज्ञानिक जांच और खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन आवश्यक है।
हरदोई में करीब 38 हजार लीटर दूध जब्त किए जाने का मामला इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि इसमें बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह जताया गया है। लेकिन यह भी उतना ही जरूरी है कि जांच के नतीजों के बिना किसी उत्पाद या संचालक को दोषी न ठहराया जाए।
यदि नमूनों में गड़बड़ी पाई जाती है, तो प्रशासन के लिए यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि दूध कहां से आया था, उसका वितरण कहां होना था और उससे उपभोक्ताओं तक पहुंचने की कितनी संभावना थी। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में दूध के वितरण और उसकी आपूर्ति से संबंधित विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।
खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी पर भी रहेगी नजर
पूनम डेयरी में हुई कार्रवाई के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। दूध जैसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की नियमित जांच से गुणवत्ता संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान की जा सकती है। इसके लिए उत्पादन, भंडारण, प्रसंस्करण और वितरण की प्रक्रियाओं पर निर्धारित नियमों के अनुसार निगरानी जरूरी होती है।
ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच से न केवल उपभोक्ताओं का भरोसा बनाए रखने में मदद मिलती है, बल्कि संबंधित कारोबारियों को भी निष्पक्ष प्रक्रिया का अवसर मिलता है। यदि कोई उल्लंघन सामने आता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि जांच में मिलावट की पुष्टि नहीं होती, तो तथ्यों को उसी अनुरूप सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
हरदोई प्रशासन की इस कार्रवाई में अब प्रयोगशाला की रिपोर्ट निर्णायक महत्व रखेगी। सात नमूनों के परीक्षण से दूध और अन्य सामग्री की गुणवत्ता के संबंध में स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
संडीला औद्योगिक क्षेत्र स्थित पूनम डेयरी में छापेमारी के दौरान करीब 38 हजार लीटर दूध जब्त किया गया है। मौके पर केमिकल और अन्य सामग्री मिलने के बाद अधिकारियों ने मिलावट की आशंका जताई और सात नमूने प्रयोगशाला भेजे। उपजिलाधिकारी नारायणी भाटिया के मुताबिक, रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि जांच में दूध की गुणवत्ता को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं। क्या नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए जाएंगे या मिलावट की आशंका की पुष्टि होगी? इसका उत्तर प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही मिलेगा।













