इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया। सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के सांसद रमाशंकर राजभर ने लोकसभा में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के मानदेय, आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति तथा कुपोषण जैसी गंभीर समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने संसद में अतारांकित प्रश्न संख्या 1143 (क) के माध्यम से केंद्र सरकार से पूछा कि क्या आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के वेतन (मानदेय) ढांचे में वृद्धि करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन है। साथ ही उन्होंने देवरिया और बलिया जनपद के जर्जर आंगनबाड़ी भवनों की संख्या तथा कुपोषण को समाप्त करने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की भी विस्तृत जानकारी मांगी।
सांसद के सवालों का जवाब देते हुए महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने सरकार की वर्तमान नीति और योजनाओं की जानकारी सदन में दी। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां और सहायिकाएं नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय की मानद कार्यकर्ता हैं, जिन्हें बच्चों के पोषण, देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़े कार्यों के लिए मानदेय दिया जाता है।
मानदेय बढ़ाने के प्रस्ताव पर सरकार ने दी जानकारी
लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं का मानदेय समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि एक अक्टूबर 2018 से केंद्र सरकार ने मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि की थी।
सरकार के अनुसार, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मासिक मानदेय 3,000 रुपये से बढ़ाकर 4,500 रुपये किया गया, जबकि आंगनबाड़ी सहायिकाओं का मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,250 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। इसके अलावा कार्य निष्पादन के आधार पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को 500 रुपये और सहायिकाओं को 250 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।
मंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था केंद्र और राज्यों के बीच निर्धारित लागत साझाकरण (कॉस्ट शेयरिंग) प्रणाली के तहत लागू की जाती है।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की भूमिका पर सरकार का पक्ष
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां और सहायिकाएं स्थानीय समुदाय से जुड़ी मानद कार्यकर्ता होती हैं। वे स्वेच्छा से बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, टीकाकरण, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा और गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की देखभाल जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में सहयोग करती हैं।
मंत्री ने कहा कि इन कार्यकर्ताओं की सेवाएं समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) योजना के संचालन में बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसी कारण समय-समय पर उनके मानदेय में वृद्धि और प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था की जाती रही है।
देवरिया और बलिया के जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी मांगी जानकारी
सांसद रमाशंकर राजभर ने अपने प्रश्न में देवरिया और बलिया जिलों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों के जर्जर भवनों की संख्या के संबंध में भी जानकारी मांगी। उनका कहना था कि कई आंगनबाड़ी केंद्र पर्याप्त संसाधनों और सुरक्षित भवनों के अभाव में संचालित हो रहे हैं, जिससे बच्चों और कार्यकर्ताओं दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि ऐसे जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण या मरम्मत के लिए क्या योजना बनाई गई है, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिल सके।
कुपोषण दूर करने की योजनाओं पर भी उठाया सवाल
सांसद ने संसद में यह भी जानना चाहा कि देश में कुपोषण की समस्या को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार कौन-कौन से प्रभावी कदम उठा रही है।
सरकार की ओर से बताया गया कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के बेहतर पोषण के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से पूरक पोषण, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, पोषण जागरूकता और प्रारंभिक बाल देखभाल जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सरकार ने कहा कि कुपोषण को कम करने के लिए राज्यों के सहयोग से कई कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं और आंगनबाड़ी केंद्र इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांगों पर फिर शुरू हुई चर्चा
लोकसभा में यह मुद्दा उठने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। लंबे समय से विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा मानदेय में वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सुविधाओं की मांग की जाती रही है।
सांसद द्वारा संसद में यह विषय उठाए जाने को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर रखने की एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में सरकार इस विषय पर आगे भी विचार कर सकती है।
मीडिया प्रभारी ने दी जानकारी
सांसद कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, लोकसभा में पूछे गए इस प्रश्न और सरकार के उत्तर की जानकारी सांसद के मीडिया प्रभारी मंजूर आलम ने साझा की। उन्होंने बताया कि सांसद रमाशंकर राजभर लगातार जनहित से जुड़े मुद्दों को संसद में प्रभावी ढंग से उठा रहे हैं और क्षेत्र के लोगों से जुड़े विषयों पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के मानदेय, आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति और कुपोषण जैसे विषय सीधे तौर पर महिलाओं और बच्चों के कल्याण से जुड़े हैं। ऐसे में इन मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।













