18 अक्टूबर 2026 1:38 पूर्वाह्न

चित्रकूट बिजली संकट : अघोषित कटौती और बंद पंप कैनालों से त्रस्त किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी

चित्रकूट में बिजली संकट और बंद पंप कैनालों के विरोध में किसानों के प्रदर्शन की फीचर इमेज, जिसमें रिपोर्टर संजय सिंह राणा की तस्वीर के साथ किसान, बिजली लाइन और सिंचाई का सांकेतिक दृश्य दिखाया गया है।

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रिपोर्ट: संजय सिंह राणा

चित्रकूट जनपद के पहाड़ी क्षेत्र में लगातार बनी हुई बिजली संकट और सिंचाई व्यवस्था की बदहाली को लेकर किसानों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। गुरुवार को किसानों और क्षेत्रीय नागरिकों ने जिलाधिकारी चित्रकूट को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर पहाड़ी फीडर, सरधुवा फीडर, राजापुर फीडर एवं गनीवां फीडर की क्षमता बढ़ाने, अघोषित बिजली कटौती समाप्त करने तथा रोटेशन के अनुसार नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कराने की मांग की। इसके साथ ही औरो पंप कैनाल, लोहदा पंप कैनाल, लघियारी पंप कैनाल तथा चिल्ली पंप कैनाल की मरम्मत कर उन्हें सुचारु रूप से संचालित कराने की भी मांग उठाई गई।

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो हजारों किसान और ग्रामीण शांतिपूर्ण आंदोलन करने के लिए विवश होंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।


फीडरों की कम क्षमता से लगातार बाधित हो रही बिजली आपूर्ति

जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि पहाड़ी, सरधुवा, राजापुर और गनीवां फीडरों के अंतर्गत आने वाले गांवों में लंबे समय से नियमित बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है। फीडरों की क्षमता कम होने के कारण ओवरलोडिंग की समस्या बनी रहती है और बार-बार बिजली बाधित होती है। परिणामस्वरूप ग्रामीणों को घंटों बिजली से वंचित रहना पड़ता है।

किसानों का कहना है कि अघोषित बिजली कटौती अब सामान्य स्थिति बन चुकी है। निर्धारित रोस्टर के अनुसार भी बिजली उपलब्ध नहीं हो रही है, जिससे ग्रामीण जीवन और खेती-किसानी दोनों प्रभावित हो रहे हैं।


धान की रोपाई पर पड़ा सीधा असर, बंद पड़े हैं ट्यूबवेल

ज्ञापन में कहा गया है कि इस समय धान की रोपाई का महत्वपूर्ण मौसम चल रहा है, लेकिन पर्याप्त बिजली न मिलने से अधिकांश निजी और सरकारी ट्यूबवेल बंद पड़े हैं। खेतों तक समय पर पानी नहीं पहुंच पाने के कारण धान की रोपाई प्रभावित हो रही है।

किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो इस वर्ष धान उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और उनकी आजीविका भी प्रभावित होगी।


पंप कैनालों की बदहाल व्यवस्था से बढ़ी किसानों की परेशानी

ज्ञापन में औरो पंप कैनाल, लोहदा पंप कैनाल, लघियारी पंप कैनाल तथा चिल्ली पंप कैनाल की खराब स्थिति का भी उल्लेख किया गया है। किसानों के अनुसार कई पंप कैनाल पूरी तरह बंद पड़े हैं, जबकि कुछ स्थानों पर उनका संचालन बेहद खराब स्थिति में हो रहा है।

इन कैनालों के सुचारु रूप से संचालित न होने के कारण खेतों तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में किसान बिजली संकट और सिंचाई संकट दोनों का सामना करने को मजबूर हैं।

किसानों ने प्रशासन के सामने रखीं प्रमुख मांगें

ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी संबंधित फीडरों की क्षमता बढ़ाई जाए ताकि ओवरलोडिंग समाप्त हो सके। इसके साथ ही क्षेत्र में अघोषित बिजली कटौती बंद कर रोटेशन के अनुसार नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

किसानों ने यह भी मांग की कि बंद पड़े पंप कैनालों की तत्काल मरम्मत कराकर उन्हें पूरी क्षमता के साथ चालू कराया जाए, जिससे खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंच सके और धान की रोपाई समय पर पूरी हो सके।

‘समय रहते समाधान नहीं हुआ तो होगा आंदोलन’

ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वर्तमान परिस्थितियों में किसान बेहद निराश और परेशान हैं। बिजली और सिंचाई की समस्या लगातार बनी रहने से खेती संकट में पड़ गई है।

किसानों ने प्रशासन को एक सप्ताह का समय देते हुए कहा है कि यदि इस अवधि में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो पहाड़ी क्षेत्र के हजारों किसान एवं आम नागरिक शांतिपूर्ण तरीके से धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करेंगे। इसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

कई किसान प्रतिनिधियों ने किया ज्ञापन का समर्थन

ज्ञापन पर किसान प्रतिनिधियों एवं क्षेत्र के अनेक ग्रामीणों के हस्ताक्षर किए गए। ज्ञापन सौंपने वालों में आशीष मिश्रा सहित कई किसान नेता एवं ग्रामीण शामिल रहे। किसानों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल बिजली और सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाना है ताकि किसानों को समय पर पानी और बिजली मिल सके तथा खेती प्रभावित न हो।

क्षेत्र की कृषि व्यवस्था पर मंडरा रहा संकट

विशेषज्ञों का मानना है कि चित्रकूट जैसे कृषि प्रधान जिले में धान रोपाई के समय यदि बिजली और सिंचाई की समस्या बनी रहती है तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ेगा। ऐसे में प्रशासन के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करे।

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