17 अक्टूबर 2026 9:26 अपराह्न

पंचायत सचिव का डांस वीडियो वायरल, ग्रामीणों ने उठाए सवाल ; विभागीय जांच शुरू

लखनऊ के माल विकास खंड के पंचायत सचिव सद्गुरु प्रसाद के वायरल डांस वीडियो का कोलाज, रिपोर्टर ठाकुर बख्श सिंह की तस्वीर के साथ फीचर इमेज।

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ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट

लखनऊ के माल विकास खंड में तैनात एक पंचायत सचिव इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। पंचायत सचिव सद्गुरु प्रसाद का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह एक निजी कार्यक्रम के दौरान स्टेज पर एक डांसर के साथ डांस करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के वायरल होने के बाद कुछ ग्रामीणों ने पंचायत सचिव के सार्वजनिक आचरण को लेकर सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की जांच की मांग की है। मामले को लेकर विभाग ने भी संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

हालांकि, वायरल वीडियो की वास्तविक तारीख, स्थान और परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। पंचायत सचिव ने भी वीडियो को पुराना बताते हुए कहा है कि सोशल मीडिया पर इसे संदर्भ से अलग तरीके से प्रसारित किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

निजी कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो में पंचायत सचिव सद्गुरु प्रसाद एक निजी कार्यक्रम में स्टेज पर डांस करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में उनके साथ एक महिला डांसर भी दिखाई देती है। कार्यक्रम के दौरान बैकग्राउंड में ‘जिंदगी इम्तिहान लेती है और लोगों की जान लेती है…’ गीत बजता सुनाई दे रहा है।

वीडियो सामने आने के बाद यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। कुछ ग्रामीणों ने सरकारी कर्मचारी के सार्वजनिक कार्यक्रम में इस तरह डांस करने को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि पंचायत सचिव ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करते हैं, इसलिए उनके सार्वजनिक व्यवहार को लेकर भी लोगों की अपेक्षाएं रहती हैं।

हालांकि, केवल वीडियो के आधार पर किसी कर्मचारी के आचरण को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसी वजह से विभागीय जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शराब के नशे में होने का दावा, लेकिन पुष्टि नहीं

वायरल वीडियो को लेकर कुछ ग्रामीणों ने दावा किया है कि कार्यक्रम के दौरान पंचायत सचिव कथित तौर पर शराब के नशे में थे। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो में ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है जिसके आधार पर इस दावे को तथ्य के रूप में स्थापित किया जा सके।

यही वजह है कि मामले में सामने आए आरोपों और दावों को जांच के निष्कर्ष से अलग रखना जरूरी है। विभागीय अधिकारी भी वीडियो की सत्यता, उसकी अवधि और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं।

चार ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी संभालते हैं सद्गुरु प्रसाद

जानकारी के मुताबिक, पंचायत सचिव सद्गुरु प्रसाद पिछले करीब तीन वर्षों से माल विकास खंड में तैनात हैं। वर्तमान में उनके पास नबीपनाह, आंट, सैदापुर और हसनापुर ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी बताई जा रही है।

इससे पहले वह करीब सात वर्षों तक मलिहाबाद विकास खंड में कार्यरत रहे हैं। पंचायत सचिव का पद ग्रामीण प्रशासन की व्यवस्था में महत्वपूर्ण माना जाता है। ग्राम पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, अभिलेखीय कार्यों और विभिन्न प्रशासनिक गतिविधियों में पंचायत सचिव की भूमिका रहती है। ऐसे में उनके खिलाफ उठे किसी भी आरोप की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जाती है।

ग्रामीणों ने पुराने वीडियो का भी किया जिक्र

कुछ ग्रामीणों ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर दावा किया कि पंचायत सचिव से जुड़ा एक अन्य वीडियो भी पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। ग्रामीणों का आरोप है कि उस समय भी मामले को लेकर चर्चा हुई थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई।

ग्रामीणों ने अब वायरल हुए वीडियो की जांच के साथ पंचायत सचिव के कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों की भी जांच कराने की मांग उठाई है। हालांकि, इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ पहले भी शिकायतें या आरोप सामने आए हैं तो विभाग को रिकॉर्ड के आधार पर उनकी जांच करनी चाहिए। दूसरी ओर, किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई केवल प्रमाणित तथ्यों और विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होनी चाहिए।

पंचायत सचिव ने बताया वीडियो पुराना

वायरल वीडियो को लेकर पंचायत सचिव सद्गुरु प्रसाद ने अपनी सफाई दी है। उनका कहना है कि उन्हें स्वयं यह जानकारी नहीं है कि वीडियो कब और कहां बनाया गया था। उन्होंने वीडियो को पुराना बताते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर उसे तोड़-मरोड़कर प्रसारित किया जा रहा है।

सद्गुरु प्रसाद के मुताबिक, वीडियो वर्ष 2022 या 2023 का हो सकता है। उनका कहना है कि वर्तमान संदर्भ में वीडियो को प्रसारित किया जाना सही नहीं है। उन्होंने वीडियो के जरिए लगाए जा रहे आरोपों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

अब जांच के दौरान यह पता लगाया जाना महत्वपूर्ण होगा कि वायरल वीडियो वास्तव में कब का है, किस स्थान पर रिकॉर्ड किया गया था और उसमें दिखाई दे रहे घटनाक्रम की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।

विभाग ने लिया संज्ञान, जांच के बाद तय होगी कार्रवाई

मामले में ADO पंचायत सुनील सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया वायरल वीडियो पुराना प्रतीत हो रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की विभागीय जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारी के इस बयान से साफ है कि फिलहाल विभाग ने वायरल वीडियो को अंतिम प्रमाण मानकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय जांच की प्रक्रिया शुरू की है। जांच में वीडियो की प्रामाणिकता, उसकी तारीख और संबंधित परिस्थितियों के साथ पंचायत सचिव के आचरण से जुड़े तथ्यों को देखा जा सकता है।

वहीं माल की BDO सर्जना शुक्ला ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का विभाग ने संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता अथवा सेवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित पंचायत सचिव के खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

जांच रिपोर्ट पर टिकी आगे की कार्रवाई

फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु विभागीय जांच की रिपोर्ट होगी। सोशल मीडिया पर किसी वीडियो के वायरल होने के बाद उससे जुड़े दावों और आरोपों को लेकर तत्काल निष्कर्ष निकालने के बजाय उसकी सत्यता और संदर्भ की जांच जरूरी होती है।

पंचायत सचिव ने वीडियो को पुराना बताया है, जबकि ग्रामीणों ने इसे लेकर अलग-अलग सवाल उठाए हैं। ऐसे में विभाग के सामने वीडियो की वास्तविकता और उससे जुड़े तथ्यों की पुष्टि करना अहम होगा।

यदि जांच में वीडियो के संबंध में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं और यह साबित होता है कि संबंधित कर्मचारी ने सेवा नियमों या विभागीय आचरण संहिता का उल्लंघन किया है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो मामले की वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से शुरू हुआ यह मामला अब विभागीय जांच तक पहुंच चुका है। इसलिए फिलहाल पंचायत सचिव के खिलाफ किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वायरल वीडियो की वास्तविकता क्या है और इस मामले में विभाग की ओर से कोई कार्रवाई बनती है या नहीं।

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