20 अक्टूबर 2026 2:42 पूर्वाह्न

पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा दांव, OBC आयोग गठन से खुला चुनावी रास्ता

उत्तर प्रदेश कैबिनेट बैठक की तस्वीर के साथ रिपोर्टर कमलेश कुमार चौधरी का फीचर इमेज, जिसमें पंचायत चुनाव, OBC आयोग और योगी सरकार के बड़े फैसलों को दर्शाया गया है।

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कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने प्रदेश की राजनीति और चुनावी समीकरणों को नई दिशा दे दी है। सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कैबिनेट बैठक में कुल 12 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए नए पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को लेकर हो रही है।

सरकार के इस फैसले को पंचायत चुनावों से पहले बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। लंबे समय से पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था को लेकर कानूनी और राजनीतिक असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। अब सरकार ने समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी देकर चुनावी प्रक्रिया के सामने खड़ी सबसे बड़ी बाधा को दूर करने की कोशिश की है।

पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण तय करेगा नया आयोग

राज्य सरकार द्वारा गठित किया जाने वाला यह आयोग पंचायत स्तर पर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की वास्तविक हिस्सेदारी और जनसंख्या के आंकड़ों का अध्ययन करेगा। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायत चुनावों में सीटों का आरक्षण और रोटेशन तय किया जाएगा।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए “ट्रिपल टेस्ट” फॉर्मूले को अनिवार्य बनाया था। इस फॉर्मूले के तहत राज्य सरकार को आरक्षण देने से पहले वैज्ञानिक सर्वे, आयोग की रिपोर्ट और आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना जरूरी होता है।

यूपी सरकार का नया आयोग इसी प्रक्रिया को पूरा करेगा। पांच सदस्यीय इस आयोग की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। आयोग का कार्यकाल छह महीने निर्धारित किया गया है। माना जा रहा है कि सरकार चुनाव से पहले रिपोर्ट हासिल कर पंचायत चुनावों की अधिसूचना जारी करने की तैयारी में है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला सीधे तौर पर ग्रामीण राजनीति और ओबीसी वोट बैंक को प्रभावित करेगा। प्रदेश की बड़ी आबादी गांवों में निवास करती है और पंचायत चुनावों का असर आगामी विधानसभा चुनावों तक दिखाई देता है। ऐसे में सरकार ने कानूनी मजबूती के साथ राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की है।

लखनऊ मेट्रो विस्तार को मिली मंजूरी

कैबिनेट बैठक में राजधानी लखनऊ के लिए भी बड़ा फैसला लिया गया। चारबाग से बसंतकुंज तक प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर को मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) को भी स्वीकृति मिल गई।

सरकार का दावा है कि इस विस्तार से राजधानी के दक्षिणी हिस्सों को बेहतर यातायात सुविधा मिलेगी। लगातार बढ़ती आबादी और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए मेट्रो विस्तार को शहर के भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

चारबाग पहले से ही रेलवे स्टेशन और बस अड्डे का प्रमुख केंद्र है। अब मेट्रो विस्तार के जरिए शहर के बाहरी इलाकों को जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इससे लाखों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

वेटरनरी छात्रों को बड़ा तोहफा

योगी सरकार ने पशु चिकित्सा के छात्रों को भी राहत देते हुए उनके इंटर्नशिप भत्ते में तीन गुना बढ़ोतरी कर दी है। अब तक जहां वेटरनरी छात्रों को मात्र 4 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 12 हजार रुपये कर दिया गया है।

सरकार का कहना है कि इससे छात्रों को आर्थिक सहायता मिलेगी और पशु चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए इस फैसले को किसानों और पशुपालकों के हित में भी माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय से वेटरनरी छात्र इंटर्नशिप भत्ता बढ़ाने की मांग कर रहे थे। अब सरकार के इस फैसले से युवाओं में सकारात्मक संदेश जाएगा।

स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर सरकार का जोर

कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कई बड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली। लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में 1010 बेड का अत्याधुनिक इमरजेंसी सेंटर बनाया जाएगा।

इसके साथ ही सुपर स्पेशियलिटी इमरजेंसी सेंटर निर्माण को भी स्वीकृति दे दी गई है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश में गंभीर मरीजों के इलाज की बेहतर व्यवस्था विकसित करना है।

स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के विस्तार का रास्ता भी साफ हो गया है। माना जा रहा है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं और अधिक मजबूत होंगी।

कोविड महामारी के बाद स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है और योगी सरकार भी मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है।

आगरा मेट्रो परियोजना को भी मिली रफ्तार

कैबिनेट बैठक में आगरा मेट्रो परियोजना से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए। आगरा मेट्रो कॉरिडोर-2 के लिए भूमि हस्तांतरण को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा मेट्रो स्टेशन और वायाडक्ट निर्माण को भी हरी झंडी मिल गई।

ताजमहल नगरी आगरा में पर्यटन और यातायात दोनों के लिहाज से मेट्रो परियोजना को बेहद अहम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे शहर में ट्रैफिक दबाव कम होगा और पर्यटकों को आधुनिक परिवहन सुविधा मिलेगी।

प्रशासनिक और कानूनी बदलावों पर भी फैसला

कैबिनेट ने यूपी जन्म-मृत्यु पंजीकरण नियमावली 2026 लागू करने को भी मंजूरी दी है। इससे जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़ी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग संशोधन विनियम 2026 को भी मंजूरी दी गई है। सरकार का दावा है कि इससे भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी।

प्रतिभूति संबंधी 2007 की अधिसूचना में संशोधन का प्रस्ताव भी पारित किया गया। हालांकि सरकार की ओर से इसके विस्तृत प्रावधानों की जानकारी बाद में जारी किए जाने की संभावना है।

मिर्जापुर में खुलेगी सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी

कैबिनेट ने मिर्जापुर में सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी की स्थापना का रास्ता भी साफ कर दिया है। पूर्वांचल क्षेत्र में उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि नई यूनिवर्सिटी बनने से क्षेत्र के छात्रों को बेहतर शैक्षणिक अवसर मिलेंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

पंचायत चुनावों के मद्देनजर फैसलों के राजनीतिक मायने

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि योगी सरकार के ये फैसले केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। पंचायत चुनाव ग्रामीण राजनीति की धुरी माने जाते हैं और इनका असर लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों तक दिखाई देता है।

OBC आयोग गठन का फैसला खास तौर पर राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। प्रदेश में पिछड़ा वर्ग बड़ा वोट बैंक है और पंचायत स्तर पर उनकी भागीदारी को लेकर लंबे समय से बहस चल रही थी।

सरकार ने एक तरफ कानूनी प्रक्रिया को मजबूत करने की कोशिश की है, वहीं दूसरी तरफ विकास परियोजनाओं और युवाओं से जुड़े फैसलों के जरिए अलग-अलग वर्गों को साधने का प्रयास भी किया है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि योगी सरकार के ये फैसले प्रदेश की राजनीति और पंचायत चुनावों की दिशा को किस तरह प्रभावित करते हैं।

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