टकराव से ही निखरता है राज और समाज का रिश्ता
राज-समाज | साप्ताहिक स्तंभ सामाजिक विकास में टकराव साधता भी है और सुधारता भी है लेखक: केवल कृष्ण पनगोत्रा हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी में घटने वाली अधिकांश घटनाएं प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में कहीं न कहीं राज और समाज से जुड़ी रहती हैं। कहीं राज पर उंगली उठती है तो कहीं समाज पर! अगर मानव … टकराव से ही निखरता है राज और समाज का रिश्ता को पढ़ना जारी रखें
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